पीडीडीयू नगर। देश के तीन बाल यीशु चर्च में एक पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर के यूरोपिन कॉलोनी स्थित क्राइस्ट द किंग बाल यीशु चर्च में स्थापित बाल यीशु की मूर्ति को जर्मनी से आई आंखें जीवंत बनाती है। छह वर्ष पहले जर्मनी से आंखें मंगाकर बाल यीशु को लगाई गई थी। गिरजाघर प्रांगण में लगी बाल यीशु की प्रतिमा की आंखे ही लोंगों का मन मोह लेती है ।
पूरे देश में बेंगलुरू और नासिक के अलावा पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर में बाल यीशु का चर्च है। नगर के यूरोपियन कालोनी में साढ़े तीन दशक पूर्व फादर स्वान ली डिसूजा की देख रेख में चर्च की स्थापना की गई थी। यहां दो मूर्तियां हैं। इसमें एक चर्च में और दूसरा क्रूस यात्रा दृश्य स्थल पर। छह वर्ष पहले धर्माचार्यों से वार्ता कर तत्कालीन फादर विपिन सीजे ने रंग रोगन कर बाल यीशु की प्रतिमा को और आकर्षक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसी क्रम में जर्मनी के एक भक्त ने विशेष धातु की आंख लगाने का प्रस्ताव रखा। लाखों रुपये खर्च कर इसे पीडीडीयू नगर लाया गया। मुंबई से कारीगर बुलाए गए। मुंबई से यहां रंग बिरंगे नग और विदेशों से पेंट मंगाया गया । विशेष प्रार्थना सभा के बीच मूर्तियों को स्थापित किया गया। और बाल यीशु की प्रतिमा में इस आंख को लगाया गया। इस आंख के लगने से बाल यीशु की प्रतिमा जीवंत हो उठी है। चर्च में पहुंचने पर हर कोई बाल यीशु की आंखों को निहारता है।
पूरे देश में बेंगलुरू और नासिक के अलावा पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर में बाल यीशु का चर्च है। नगर के यूरोपियन कालोनी में साढ़े तीन दशक पूर्व फादर स्वान ली डिसूजा की देख रेख में चर्च की स्थापना की गई थी। यहां दो मूर्तियां हैं। इसमें एक चर्च में और दूसरा क्रूस यात्रा दृश्य स्थल पर। छह वर्ष पहले धर्माचार्यों से वार्ता कर तत्कालीन फादर विपिन सीजे ने रंग रोगन कर बाल यीशु की प्रतिमा को और आकर्षक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसी क्रम में जर्मनी के एक भक्त ने विशेष धातु की आंख लगाने का प्रस्ताव रखा। लाखों रुपये खर्च कर इसे पीडीडीयू नगर लाया गया। मुंबई से कारीगर बुलाए गए। मुंबई से यहां रंग बिरंगे नग और विदेशों से पेंट मंगाया गया । विशेष प्रार्थना सभा के बीच मूर्तियों को स्थापित किया गया। और बाल यीशु की प्रतिमा में इस आंख को लगाया गया। इस आंख के लगने से बाल यीशु की प्रतिमा जीवंत हो उठी है। चर्च में पहुंचने पर हर कोई बाल यीशु की आंखों को निहारता है।