चंदौली। चंदौली संसदीय क्षेत्र में इस बार काफी रोचक का मुकाबला देखने को मिला है। सपा के बीरेंद्र सिंह ने न सिर्फ भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को हैट्रिक बनाने से रोकते हुए सिंह दुर्ग को भेदने में सफलता अर्जित की। उन्होंने सपा को जीत ही नहीं दिलाई बल्कि छत्रप भी बनने का गौरव हासिल किया है। चंदौली विकास के रूप में भले ही देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल हो, लेकिन राजनीतिक उर्वरक शक्ति के लिए देश और प्रदेश में चर्चित रहा है। राममनोहर लोहिया से लेकर मुख्यमंत्री और रेल मंत्री रहे पंडित कमलापति त्रिपाठी की कर्मभूमि रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान की केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी का पैतृक गांव भभौरा भी चंदौली में ही है। इस बार के चुनाव में मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय खड़े रहे। इस जिले से दो -दो राज्यसभा सांसद साधना सिंह और दर्शना सिंह जिले का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। यही नहीं लोकसभा क्षेत्र पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटा हुआ जिला है। ऐसे में इस सीट की महत्ता बहुत बढ़ गई थी। अपनी सीट बचाने के लिए डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने 2024 में महेंद्र पांडेय की विरोधी गुट की नेता माने जाने वाली मुगलसराय से पूर्व विधायक साधना सिंह को भी राज्यसभा भेज कर चंदौली के ''सिंह दुर्ग'' की किलेबंदी मजबूत करने की कोशिश की। सशक्त विधायक कहे जाने वाले सुशील सिंह, लगातार तीन बार से जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर कब्जा रखने वाले छत्रबली सिंह ने जिले को पूरी तरह मजबूत बना दिया। मिर्जापुर से बीजेपी एमएलसी विनीत सिंह भी चंदौली की क्षत्रिय राजनीति में हस्तक्षेप रखते हैं और वह डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के करीबी माने जाते हैं। इसके अलावा पूर्व एमएलसी ब्रजेश सिंह और उनकी पत्नी एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह की भी भाजपा से नजदीकियां जगजाहिर हैँ। इस तरह केंद्रीय मंत्री महेंद्र पांडेय की चंदौली लोकसभा सीट को भाजपा ने पूरी तरह से ''सिंह दुर्ग'' में तब्दील कर दिया गया था। इस चुनाव में सबको पछाड़ते हुए सपा के बीरेंद्र सिंह ने सिंह दुर्ग को ध्वस्त कर छत्रप बनने में सफल हो गए। उन्होंने मोदी सरकार के दसवें नंबर के मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को शिकस्त दी।