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भिक्षाटन कर शिक्षा की अलख जगा रहे हैं दुर्गेश

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पीडीडीयू नगर। जहां रहेगा वहीं रौशनी लुटाएगा, किसी चराग का अपना मकां नहीं होता’.....वसीम बरलेवी यह पंक्तियां दुर्गेश सिंह पर सटीक बैठती है जिसमें गरीब व असहाय बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए अपने घर तक को छोड़ने सभी जरा भी परहेज नहीं किया। दुर्गेश गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए भिक्षाटन करते है और इसके लिए वह अपने घर से चालीस किलोमीटर दूर तक भी चले जाते है। भिक्षाटन में मिले रुपये से अब तक 11000 बच्चों की सहायता शिक्षा के लिए कर चुकें है । उन्हें इस नेक कार्य के लिए तहसील व ब्लॉक स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
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जनपद के आवाजपुर गांव के रहने वाले दुर्गेश सिंह पिछले पांच वर्षों से इस कार्य में लगे हुए हैं। बीए तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके दुर्गेश ने बताया कि शुरू में जब भिक्षा मांगकर गरीब व असहाय बच्चों की मदद की तो उनका काफी उपहास हुआ। उनके शुरूआती दौर में उनके परिवार ने भी साथ देने से इंकार कर दिया। इन सबके बाद भी उनके हौसले पस्त नहीं हुए। पत्नी भी छोड़कर मायके चली गई थी। लेकिन बाद में जब उन्हें इस रास्ते में सफलता मिलनी शुरू हुई और समाज और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस कार्य के लिए सम्मानित किया जाने लगा तो घर परिवार में भी सब कुछ सामान्य हो गया। तीन साल बाद पत्नी मायके से घर लौट आई तो पिता ने अपने इस दृढ़ इच्छा शक्ति वाले बेटे दुर्गेश को गले लगाया। दुर्गेश ने बताया संकट के समय उनके बड़े भाई डॉ. वीके सिंह ने काफी सहयोग किया और उनकी हौसला बढ़ाया। कहा कि इस कार्य की प्रेरणा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय और नोबल पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी व मलाला युसुफ़जई से मिली है। जिस प्रकार से महामना ने भिक्षाटन किया था उसी प्रकार वह भी भिक्षाटन का रास्ता अपना कर गरीब व असहाय बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं। साथी ही अन्य दोनों से दुश्वारियों के बीच कार्य करने की हौसला की सीख मिलती है। यह सभी लोग उनके प्रेरणा स्रोत है। दुर्गेश सिंह को एसडीएम विजय नारायण सिंह ने भी उन्हें इस कार्य के लिए सम्मानित किया है। अभी हाल ही में छह जनवरी को उन्होंने सोमवार को बच्चों की शिक्षा के लिए पड़ाव क्षेत्र स्थित दुकानदारों से भिक्षा मांगी थी।
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