इलिया। मनुष्य के जीवन में भगवान की भक्ति अति आवश्यक है। धर्म काज से जोड़ने के लिए मनुष्य को पूजा परिवार के लिए और भक्ति भगवान के लिए करना जरूरी है। पूजा के पीछे ही भक्ति है। बिना अनुराग के भगवान इस दुनिया में मिलने वाले नहीं है। प्रेम अगर संसार से हो तो उसे राग कहते हैं। अगर प्रेम भगवान से हो तो उसे अनुराग कहते हैं। राम कथा मनुष्य को संस्कार का महत्व सिखाती है। ये बातें खरौझा हिनौती स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान सेवा समिति की ओर से चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के सातवीं निशा पर कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने कही। शालिनी त्रिपाठी ने केवट प्रसंग को अत्यंत जीवंत शैली में प्रस्तुत किया। जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। कहा कि प्रभु राम और केवट के संवाद में केवट का अनन्य प्रेम और प्रभु राम की विनम्रता प्रकट हुई। केवट ने प्रभु राम के पांव पखारने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह बिना पांव धोए उन्हें नाव में नहीं बैठाएगा। उसने यह भी कहा कि उसे डर है कि कहीं प्रभु राम के चरणों की धूल से उसकी नाव भी नारी न बन जाए। केवट ने सजल नेत्रों से प्रभु राम के कोमल चरणों को देखकर कहा कि राजा प्रजा को आदेश देता है लेकिन आप जगत के मालिक होते हुए भी कितनी विनम्रता से नाव मांग रहे हैं। केवट ने प्रभु राम से उतराई के रूप में कुछ नहीं बल्कि केवल भक्ति का वरदान मांगा। केवट की यह भावना निष्काम भक्ति और निष्कपट प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। कथावाचिका ने केवट संवाद को भावपूर्ण स्वर में दोहराया। केवट प्रभु राम से कहता है कि मैं तो यहां आपको पार लगा दूंगा किंतु वहां भवसागर में आप मुझे पार लगा दीजिएगा। इसके बाद भजन का गायन किया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। कथा के दौरान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और केवट की आकर्षक झांकी भी प्रस्तुत की गई जिसको देखकर के श्रोता भाव विभोर हो गए। कथा के दौरान राजन सिंह, विश्वनाथ द्विवेदी, परवीन वारसी, पंचदेव द्विवेदी, राजू विश्वकर्मा, त्रिवेणी द्विवेदी, रोली सिंह, प्रियंका सिंह, रूद्रप्रिया सिंह, नंदनी पांडेय आदि रहे।