कंदवा। ज्येष्ठ का महीना शुरू हो गया है। अधिकमास होने पर ज्येष्ठ महीना इस बार 59 दिनों का होगा। अधिकमास में मंदिरों में भव्य धार्मिक आयोजन होंगे। हिंदू पंचांग के तीसरे ज्येष्ठ महीने में जप, तप, साधना व दान का विशेष महत्व है। इस महीने में भगवान विष्णु और हनुमान जी की पूजा-आराधना करने से सौभाग्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य राधेश्याम चौबे ने बताया कि हर तीन साल में एक बार अधिकमास आता है। इस बार ज्येष्ठ महीने में अधिकमास का संयोग बन रहा है। ऐसे में ज्येष्ठ महीना 30 नहीं बल्कि 59 दिनों का होगा। उनके अनुसार दो मई से शुरू ज्येष्ठ महीना 29 जून तक रहेगा। इस बीच 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। जिसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। ज्येष्ठ महीना में वट अमावस व्रत 16 मई को व निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को होगा। ज्येष्ठ महीने में आठ मंगलवार पड़ेंगे। बताया कि ज्येष्ठ महीने में तीर्थयात्रा करना और पवित्र नदियों में स्नान का काफी महत्व है। इस महीने में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जल व फल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पानी की बचत करने से देवता प्रसन्न होते हैं। जीवन में आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।