भारतीय जनता पार्टी ने चकिया विधानसभा क्षेत्र के कई टिकट के दावेदारों के बीच से भाजपा में बसपा से आए पूर्व मंत्री शारदा प्रसाद को टिकट दिया है। उनको टिकट मिलने के पीछे स्वामी प्रसाद मौर्या की लामबंदी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। लंबे समय तक हाथी पर सवारी कर चुके शारदा प्रसाद के सामने अब कमल खिलाने की बड़ी चुनौती होगी।
वर्ष 2002 तथा वर्ष 2007 के विधानसभा चुनावों में चंदौली सुरक्षित सीट से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए शारदा प्रसाद वर्ष 2002 के बाद बसपा-भाजपा गठबंधन की सरकार में राज्यमंत्री भी रहे। यही नहीं वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में वे राबर्ट्सगंज सुरक्षित लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी भी थे। बाद में जब स्वामी प्रसाद मौर्या ने बसपा छोड़ भाजपा का दामन थामा, तभी शारदा प्रसाद भी उनके साथ भाजपा में हो लिए। भाजपा ने भी क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट दिया है। शारदा प्रसाद को टिकट मिलने से भाजपा के कई निष्ठावान कार्यकर्ताओं को झटका लगा है। हालांकि यह झटका कितना असर डालेगा, यह तो चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा।
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दो साथी अब होगे प्रतिद्वंदी
वर्ष 2007 के विधान सभा चुनाव में बसपा का झंडा बुलंद करने वाले पूर्व विधायक और मंत्री शारदा प्रसाद और पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार इस बार एक ही विधान सभा क्षेत्र से एक दूसरे के खिलाफ जोर आजमाइश करते नजर आएंगे। भाजपा ने चकिया सुरक्षित सीट से शारदा प्रसाद को टिकट देकर चुनावी लड़ाई को काफी रोचक बना दिया है। 2007 में बसपा की प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार में शारदा प्रसाद और जितेंद्र कुमार ने भी क्रमश: चंदौली और चकिया सीट से नुमाइंदगी की थी। दोनों ही नेता बसपा प्रमुख मायावती के करीबियों में शामिल रहे हैं। लेकिन बदले राजनीतिक समीकरणों ने दोनों सहयोगियों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया है। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ही बसपा को अलविदा कहने वाले शारदा प्रसाद को भाजपा ने अपने तीन-तीन पूर्व विधायकों की दावेदारी को दरकिनार करते हुए चकिया से टिकट पकड़ा दिया है। वहीं दूसरी तरफ बसपा के प्रति निष्ठावान रहे जितेंद्र कुमार को तीसरी दफा भी क्षेत्र से टिकट दिया। चकिया विधान सभा क्षेत्र राबर्ट्सगंज लोक सभा क्षेत्र में आता है, जहां से शारदा प्रसाद 2014 में एमपी का चुनाव भी लड़ चुके हैं।