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कोरोना काल में भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों पर छाया संकट

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पीडीडीयू नगर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने भवन निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। ऐसे में भवन निर्माण कार्य से जुड़े मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। नगर के गल्ला मंडी में प्रतिदिन मजदूरों की मंडी लगती है। यहां से लोग मोलभाव कर मजदूरों को काम के लिए ले जाते हैं। इन दिनों भवन निर्माण कार्य लगभग बंद होने के बाद भी मजदूर मंडी में आते तो हैं लेकिन काम न मिलने पर वापस खाली हाथ लौट जाते हैं। ऐसे में उनके सामने दो जून की रोटी की व्यवस्था करना भारी पड़ रहा है। नगर के गल्ला मंडी में वर्षों पहले से मजदूरों की मंडी सजती आ रही है। इसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों मजदूर काम खोजने के लिए एकत्र होते हैं। पहले इन मजदूरों से केवल गल्ला व्यवसाई ही कार्य लेते थे पर नगर का विस्तार आरंभ हुआ तो नए भवन बनवाने के लिए भी लोग यहीं से मजदूर ले जाने लगे। इन मजदूरों में राजगीर सहित भवन निर्माण के अन्य मजदूर शामिल होते हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बहुत से लोगों ने भवन निर्माण का कार्य स्थगित कर दिया है। संक्रमण के कारण लगे लॉकडाउन में भवन निर्माण सामग्री बेचने वालों की दुकानें बंद हो जा रही हैं। वहीं बालू व ईंट भी काफी कम मात्रा में आ रहे हैं। इससे इन दिहाड़ी मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है। मंडी में काम के लिए आने वाले मजदूरों की संख्या भी घटती जा रही है। काफी मजदूर दूसरे कार्यों में लिप्त हो गए हैं।
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राजगीर का कार्य करने वाले लोहरा गांव के अशोक ने बताया कि लॉकडाउन के कारण काम मिलना एकदम बंद हो गया है। इससे परिवार की आजीविका चलाने में कठिनाई हो रही है। भोगवारे गांव के दुलारे मिस्त्री ने कहा कि कोरोना का पहला चरण समाप्त होने के बाद तेजी से काम मिलने लगा था लेकिन दूसरी लहर के बाद काम ठप पड़ गया है। छेमिया गांव के राजगीर बंसीधर का कहना है कि एक तो कोरोना के कारण काम मिलना बंद हो गया है, दूसरे सरकार की ओर गरीबों को मुफ्त में राशन भी नहीं दिया जा रहा है। सरेसर गांव के मजदूर रामू ने बताया कि अब उधार पर अनाज व अन्य वस्तुएं लेकर गृहस्थी चलानी पड़ रही है। उधार मिलना बंद हो जाएगा तो फांके की स्थिति बन जाएगी।
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