पीडीडीयू नगर। नगर से सटे रौना गांव में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) निर्माण का कार्य मार्च माह के अंत तक शुरू हो जाएगा। इसके लिए गांव के दो दर्जन से अधिक किसानों की जमीन चिह्नित की गई है। 276 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 37 एमएलडी क्षमता के एसटीपी की रिपोर्ट तैयार कर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने शासन को भेज दी है। वहां से फाइल नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा राज्य इकाई को चली गई है। उम्मीद है कि हरी झंडी मिलने पर मार्च से एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर व रेलवे की कॉलोनियों से हर रोज लगभग 32 एमएलडी सीवेज नई सट्टी व काली महाल से होते हुए सीधे गंगा में गिरता है। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण की योजना है। लेकिन नगर पालिका प्रशासन और रेलवे के बीच जमीन और उसके मुआवजे को लेकर काफी दिनों तक यह मामला लटका हुआ था। बाद में नगर पालिका प्रशासन और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने रेलवे से कन्नी काटते हुए रौना में जमीन की तलाश शुरू की।
इसके बाद वहां अधिकारियों ने एसटीपी के लिए दो हेक्टेयर की जमीन रौना गांव में देखी। साथ ही दो दर्जन से ज्यादा किसानों को तैयार कर उनसे सहमति पत्र भी ले लिया है। इसके बाद वहां तहसील स्तर पर एक कमेटी का गठन कर जमीनों के अधिग्रहण व मुआवजे के लिए खाका खींचा जा रहा है। यहां 37 एमएलडी क्षमता का एसटीपी 276 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। एसटीपी को तैयार करने के लिए अधिकारियों ने तेजी से कार्य शुरू कर दिया है।
मुआवजे का हो रहा आकलन
रौना गांव में जिन किसानों की करीब दो हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है उन किसानों को मुआवजा देने के लिए गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने कमेटी गठित कर दी है। इसमें शामिल अधिकारी किसानों की जमीन अधिग्रहण कर उन्हें मुआवजा देने का आकलन कर रहे हैं। इसकी भी रिपोर्ट तैयार कर जल्द शासन को भेजी जाएगी। जिससे किसानों को मुआवजा दिया जा सके और कार्य शुरू किया जा सके।
गंगा प्रदुषण नियंत्रण इकाई के जीएम एके पुरवार ने बताया कि रौना गांव में एसटीपी निर्माण के लिए शासन को 276 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। वहां से फाइल एनएमसीजी राज्य इकाई के पास पहुंच गई है। जल्द ही वहां से निर्माण की हरी झंडी मिल जाएगी। किसानों के जमीन का मुआवजा देने के लिए गठित कमेटी आकलन कर रही है।