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Chandauli News: 25 किलो का कांवर लेकर 1800 किमी की यात्रा पर निकले

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पीडीडीयू नगर। शनिवार की सुबह छह बजे हाड़ कंपाती ठंड के बीच पड़ाव की नुकीली गिट्टियों से भरी सड़क से 30 लोगों को नंगे पांव गुजरते देख हर कोई ठिठक गया। इनके कंधे पर 25 किलो वजनी कांवर भी था लेकिन चेहरे पर एक अद्भुत चमक और मुख में हर-हर महादेव का नारा था। ये जत्था था बाबा वैद्यनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों का, जो गंगोत्री से गंगाजल लेकर 1800 किमी की पदयात्रा पर निकले थे। 94 दिनों तक नंगे पांव चलकर वे 11 जनवरी को बाबा वैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे और बाबा का अभिषेक करेंगे।
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आठवीं बार लगातार इस कठिन पदयात्रा पर निकले जत्था के अध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि 300 वर्ष पहले झारखंड स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम के तीर्थपुरोहित बाबा बम बम दास ने गंगोत्री से गंगाजल लेकर पैदल ही वैद्यनाथ धाम जाकर उनका अभिषेक किया था। तबसे यह परंपरा अनवरत चल रही है। बताया कि यात्रा काफी कठिन होती है। सुबह शौचादि से निवृत होकर चलने के बाद पूरे दिन कहीं भी शौच आदि नहीं कर सकते। पहले एकाध लोग ही इस कठिन यात्रा के लिए तैयार होते थे लेकिन अब आस्थावानों की संख्या 30 हो गई है।
पं.जयदेव मिश्र ने बताया कि हमलोग झारखंड से ट्रेन से गोमुख पहुंचे और वहां से 29 अक्टूबर को प्रत्येक व्यक्ति दो बड़े घड़ों में मां गंगा का पवित्र जल लेकर कांवर पर रखा और नंगे पांव इस यात्रा पर चल पड़ा। बताया कि 53 दिनों की पैदल यात्रा कर हमलोग 21 दिसंबर को बाबा विश्वनाथ धाम पहुंचे। उनका दर्शन-पूजन और अभिषेक कर आगे बढ़ रहे हैं। 11 जनवरी तक वैद्यनाथ धाम पहुंचने की आशा है।
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दसवीं बार पदयात्रा पर निकले 55 वर्षीय राजू झा

गोमुख से बाबा वैद्यनाथ धाम तक नंगे पांव जाने वाले आस्थावानों में कुछ ऐसे हैं जिन्हाेंने पांचवीं, छठवीं और दसवीं बार यह यात्रा की है। बताया कि अमूमन एक बार यात्रा करने के बाद दूसरी बार यात्रा नहीं करते हैं। लेकिन इन्हीं से राजू झा ऐसे हैं जो लगातार 10वीं बार इस यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने बताया मां गंगा को लेकर बाबा के पास जा रहा हूं इसके अलावा कुछ भी ध्यान नहीं है। दुख और कष्ट कहीं आसपास नहीं भटकते।
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गोमुख में शीशे की तरह साफ और पवित्र है मां गंगा का जल
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पदयात्रा पर निकले जत्थे में शामिल पं.अमित बाबा वैद्यनाथ धाम में पूरी काशी क्षेत्र के तीर्थपुरोहित हैं। बताया कि वाराणसी परिक्षेत्र का जो भी भक्त वैद्यनाथ का दर्शन करने पहुंचता है। उसके दर्शन पूजन और रहने की सारी व्यवस्थाएं उन्हीं के माध्यम से होती है। उनके पूर्वजों को काफी पहले यह क्षेत्र मिला था। पिता पं.विश्वनाथ बाबा के बाद अब वे इसकी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने बताया कि गोमुख में मां गंगा को देखकर भावना से रोंगटे खड़े हो गए। वहां गंगाजल शीशेे की तरह साफ और पवित्र है।
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रिपोर्टअमरेंद्र पांडेय
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