सकलडीहा। विकासखंड के बरठी गांव के 81 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है। विडंबना यह है कि आजादी के सात दशक बाद भी गांव के बच्चों को पढ़ाई के लिए दो किलोमीटर दूर चतुर्भजपुर व नरैना गांव के परिषदीय विद्यालय में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार गांव में स्कूल खुलवाने के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई। कोई सुनवाई नहीं हुई। गांव में विद्यालय न होने से नौनिहालों को पठन-पाठन में असुविधा होती है।
विकासखंड के पांच हजार की आबादी वाले बरठी गांव से देश की आजादी में 81 स्वत्रंता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत से मोर्चा लिया था। आजादी मिलने के बाद सकलडीहा रेलवे स्टेशन के पास स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति परिसर बनाया गया है। वर्तमान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार को सम्मानित कर चुके हैं। इसके बावजूद गांव के बच्चे को गांव से दो किलोमीटर दूर दूसरे गांव के विद्यालय में पढ़ने को विवश हैं। गांव में विद्यालय बनाने के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बाद भी उच्चाधिकारियों की उदासीनता से विद्यालय आकार नहीं ले पाया है। गांव में स्कूल न होने से स्वास्थ्य विभाग की टीम को बच्चों का टीकाकरण करने में दिक्कत होती है।
बोले ग्रामीण
गांव में प्राथमिक व पूर्व विद्यालय नहीं होने से बच्चों को काफी दिक्कत होती है। गांव में स्कूल खोलवाने के लिए अधिकारियों से कई बार मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया है। संतोष यादव।
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पांच हजार की आबादी वाले इस गांव का दुर्भाग्य है कि यहां परिषदीय विद्यालय नहीं है। इस वजह से बच्चों को चतुर्भजपुर व नरैना गांव में पढ़ाई करने जाना पड़ता है। निरंजन कुमार बौद्ध।
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परिषदीय विद्यालय बनाने के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन उदासीन है। छोटे बच्चों को दूसरे गांव में जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। आशीष कुमार पटेल।
गांव के 81 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश की आजादी में अपना योगदान दिया है। इसके बाद भी गांव में स्कूल नहीं बनाया जाना बच्चों के साथ अन्याय है। अमर बहादुर ध्रुव।
कोट.........
गांव मे स्कूल खोलने के लिए ग्रामीणों ने पत्रक सौंपा था जिसे शासन को भेज दिया गया है। स्कूल खोलने की अन्य प्रक्रियाएं पूरी कराई जा रही हैं। अवधेश राय, बीईओ।
रिपोर्ट- चंद्रजीत पटेल