मंदिर के महंत अशोक कुमार पाण्डेय के अनुसार बाद में भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास के क्रोध को शांत करने और काशी को श्राप मुक्त कराने के लिए का उपाय पूछने गए। एक दिन भगवान गणेश से प्रसन्न होकर महर्षि वेदव्यास ने उनसे वरदान मांगने को कहा। तब उन्होंने काशी को श्राप से मुक्त करने का वरदान मांग लिया।
इसके बाद उन्होंने काशी को श्राप मुक्त किया और भगवान गणेश को महाभारत रचना को लिखने के लिए तैयार भी किया। साथ ही यह भी कहा कि व्यास मंदिर में दर्शन किए बिना काशी दर्शन का पुण्य नहीं मिलेगा। तभी से इस स्थान पर व्यास मुनि को भोजन बनाकर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। सावन में भीड़ उमड़ती है।