भगवत भक्ति के बिना जीवन धन्य नहीं हो सकता।
जो भगवान का नाम लेता
है उसे जीवन में कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है।
उक्त उद्गार
त्रिदंडी स्वामी के पाद सेवक जगत गुरू समुंदर ज्ञान स्वामी जी महाराज ने
बरियारपुर गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के परिसर में चल रही भागवत कथा
के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य योनि में जन्म लेने वाले हर
व्यक्ति का धर्म है कि वह भगवान पर विश्वास करे।
भगवान की कथा का अवश्य
श्रवण करे और उसे अपने जीवन में उतारने का काम करे।
इससे उसका जीवन धन्य हो
जाएगा। जिस तरह से लोग चौथ के चंद्रमा का दर्शन नहीं करते उसी तरह मनुष्य
को भी अपने जीवन में कभी पाप, क्रोध, अहंकार का दर्शन नहीं करना चाहिए।
कहा
कि जो स्त्री अपने पति की बातों का अनादर करती है। उसे परमात्मा का दर्शन
कभी नहीं होता है। राजा उत्तानपाद ने अपनी पत्नी को घर से निकल जाने का
आदेश दिया।
पत्नी तत्काल जंगल चली गई। उसे भगवान के दर्शन हुए और पुत्र
प्राप्ति का आशीर्वाद मिला।
उसने ध्रुव जैसे तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया।
अर्थात पति के आदेशों का पालन करने वाली स्त्री कभी दुखी नहीं हो सकती। इस
अवसर पर प्रमोद पांडेय, रमाशंकर, नंदू सिंह, रामभरत सिंह, जिला सिंह,
शिवशंकर सिंह आदि मौजूद रहे।