जिले में मानकों की अनदेखी कर कंटेनरों में पानी भर कर बेचने का धंधा तेजी पर है। जिले में बगैर अनुमति पचास से अधिक ऐसे आरो प्लांट चल रहे हैं, जबकि पंजीकरण केवल एक का ही किया गया है।
मानक की जांच करने की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा औषधि विभाग की है। पर इसकी नियमित जांच नहीं हो रही है। एक हजार लीटर प्रति घंटा उत्पादन के लिए 18 गुणे 12 के स्थान की आवश्यकता होती है।
पिछले कुछ वर्षों में आई जागरूकता से घरों में आरओ लगाए जा रहे हैं। वहीं दुकानों, प्रतिष्ठानों में मिनरल वाटर की डिमांड बढ़ते ही पानी का व्यापार करने वालों की संख्या बढ़ गई है। स्थिति यह है कि जिले के हर गली मुहल्लों में कोई न कोई आरओ प्लांट बैठाकर कंटेनर से पानी आपूर्ति कर रहा है। यहां तक कि ग्रामीण इलाकों में भी विभिन्न वाहनों से घरों तक बोतल पहुंचाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में पचास से अधिक प्लांट लगे हुए हैं और यहां से प्रति दिन दो से ढाई हजार कंटेनर पानी की आपूर्ति की जा रही है। प्लांट लगवाने के पहले खाद्य सुरक्षा औषधि विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है, लेकिन जिले में पंजीकरण प्लांट की संख्या मात्र एक है। खाद्य सुरक्षा औषधि विभाग द्वारा अब तक किसी प्लांट की न तो जांच हुई है और न ही कार्रवाई ही की गई है।