जनपद में गंगा और कर्मनाशा नदियों के जलस्तर आ रही गिरावट के कारण बाढ़ग्रस्त लोगों को आंशिक राहत मिलनी शुरू हो गयी है। गंगा का जलस्तर शुक्रवार की शाम तक 17 सेंटीमीटर कम होकर 72.39 मीटर तक पहुंच गया। वहीं कर्मनाशा का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है। हालांकि गंगा नदी से प्रभावित गांवों का पानी अभी भी पूरी तरह से नहीं निकला है। जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने बाढ़ से घिरे गांव में ब्लीचिंग पाउडर के छिड़काव सहित पानी से उत्पन्न रोगों से बचाव के लिए मेडिकल टीम को सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है।
गंगा नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों का संपर्क मार्ग से आवागमन बंद हो गया है।
लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 410 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पानी में डूबी है। इससे लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी है। हालांकि मौसम में आए परिवर्तन और बारिश नहीं होने से गंगा के जलस्तर में गिरावट आ रही है। शुक्रवार की शाम तक गंगा का पानी 17 सेंटीमीटर तक घट गया था।
इससे एक ओर जहां राहत एवं बचाव कार्य में तेजी के आसार दिखने लगे हैं, वहीं संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। बाढ़ का पानी अपने साथ ढेर सारी गंदगी लेकर आया है। यदि प्रशासन बाढ़ग्रस्त इलाकों की सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं करता है तो ग्रामीण तमाम तरह के संक्रामक रोगों के जद में आ जाएंगे। वहीं कर्मनाशा नदी की बात करें तो इससे प्रभावित क्षेत्र ककरैत, ओयरचक क्षेत्र के गांव से बाढ़ का पानी निकल गया है।