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Chandauli News: नर्सरी डालने को तैयार, नहरों में पानी का इंतजार

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पीडीडीयू नगर। धान की खेती के लिए विख्यात जिले के किसान इस बार धान की नर्सरी डालने के लिए परेशान हैं क्योंकि नहरों में पानी नहीं है। गंगा के नरायनपुर पंप कैनाल से संबद्ध नहरों में ही पानी जरूर है लेकिन अन्य नदियों का पानी सूखने की वजह से पंप कैनाल नहीं चल पा रहे हैं। चंद्रप्रभा बांध का सारा पानी बह चुका है।
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जिले में लघुडाल, मूसाखांड, कर्मनाशा, चंद्रप्रभा सिस्टम व नरायनपुर लिफ्ट कैनालों और माइनरों का 856 किलोमीटर तक जाल फैला हुआ है। इसके बावजूद सैकड़ों एकड़ फसल हर साल पानी के अभाव में सूख जाती हैं। नहरों की सफाई नहीं होने के कारण टेल पानी पहुंच ही नहीं पाता है। इस साल तो स्थिति और खराब है क्योंकि बांधों और स्थानीय नदियों में पानी ही नहीं है। चंद्रप्रभा बांध का पानी सूख चुका है। उसका रिसाव रोकने के लिए स्लूज गेटों की मरम्मत कराई जा रही है लेकिन उससे पानी तभी मिलेगा जब बारिश में बांध भरे। ऐसे में किसानों को धान की खेती के लिए बादलों की ओर हसरत भरी नजरों से देखना पड़ रहा है।
धान का नर्सरी डालने का समय नजदीक आ गया है। किसान खेत तैयार करने में जुटे हैं लेकिन नहरों पानी ही नहीं है। नहरें व माइनर झाड़ से पटी हुई हैं। पटरियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे में यदि नहरों में पानी छोड़ा भी गया तो वह इधर-उधर बह जाएगा।
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धीना क्षेत्र की कपसियां माइनर व धीना राजबाहा सूखा है। तालाबों में भी पानी नहीं है। हर साल गर्मियों में तालाबों को भरा जाता था लेकिन इस बार नहरों में ही पानी नहीं है तो तालाब कैसे भरे जाएंगे। लाखों रुपये खर्च करके बने सिकठा, डिग्घी व नूरी गांव के अमृत सरोवर सूखे हैं। नूरी गांव के अमृत सरोवर में जन्मेजय सिंह ने पंपिंग सेट चलाकर पानी भरा था लेकिन वह भी सूख गया।
कमालपुर क्षेत्र में भूपौली पंप नहर, इनायतपुर-माइनर लेहरा, मनिहरा-कोलपुर माइनर, बीरासराय लघु डाल नहर हैं लेकिन किसी में पानी नहीं छोड़ा गया है। किसान पंपिंग सेटों के सहारे धान की नर्सरी डालने को मजबूर हैं। भारतीय किसान मजदूर यूनियन के मंडल अध्यक्ष दीनानाथ श्रीवास्तव का कहना है कि पहले नहरों की सफाई साल में दो बार होती थी अब वर्ष में एक बार ही सफाई कराई जा रही है और वह भी ठीक से नहीं।
इनसेट......
प्रदर्शन के बाद नहरों की सफाई शुरू
कंदवा। करौती लिफ्ट कैनाल की माइनर करौती गांव में सिंचाई का एकमात्र साधन है। दो वर्षों से इसकी सफाई नहीं हो रही है। पिछले साल बरसात में भी माइनर में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाया था। माइनर में झाड़ उगने के कारण पानी रफ्तार से नहीं आ रहा है। कुलाबा नहीं चल पा रहे हैं। किसानों ने रविवार को माइनर में खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद लघुडाल विभाग ने माइनर की फाई तो शुरू करा दी है लेकिन पानी नहीं पहुंचा है।
कोट.........
जिले में साल में एक बार नहर की सफाई नवंबर-दिसंबर माह में कराई जाती है। कुछ नहरों में पानी तीन दिन पहले छोड़ दिया गया है। शुरुआत में चार पंप खोले गए थे। अब छह पंप चल रहे हैं। बुधवार से आठ पंप चलने लगेंगे। मनोज सिंह, अधिशासी अभियंता, मूसाखांड।
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