दानगंज नियार की रामलीला में राम लक्ष्मण और जानकी वन गमन को जाते ।
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रामलीला की एकमात्र महिला पात्र हैं मुन्नी देवी
रामनगर की रामलीला में सभी कार्य पुरूष करते हैं, एकमात्र महिला पात्र मुन्नी देवी हैं। जो 25 वर्षों से नर्तकी की भूमिका निभाती हैं। रामनगर के सुल्तानपुर गांव की रहने वाली मुन्नी देवी को रामजन्मोत्सव और रामजी के विवाह पर नृत्य करने के लिए बुलाया जाता है। इनके पति विजय कुमार रामलीला में ढोलक बजाते हैं। मुन्नी देवी से पहले रामनगर के रामपुर की रहने वाली उर्मिलाबाई यह कार्य करती थीं।
कोपभवन और सीताहरण की लीला नहीं देखते महाराज
रामलीला में राजसी परंपराओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। परंपरा के अनुसार काशिराज कैकेयी कोपभवन और सीताहरण की लीलाएं नहीं देखते। ऐसी मान्यता है कि एक राजा दूसरे राजा का दु:ख नहीं देख सकता। उसी तरह श्रीराम राज्याभिषेक के दिन काशिराज पैदल चलकर लीला स्थर पर पहुंचते हैं और श्रीराम को राजतिलक लगाते हैं। क्योकि कोई राजा ही किसी होने वालो राजा का राजतिलक कर सकता है।