गुरुवार को दिन भर रह रह कर मेघ बरसते रहे। पर बरसात की परवाह न कर बहनें भाइयों को राखी बांधने घर पर पहुंच गई थीं। भाई की कलाई पर बहनों में राखी बांधी और आरती उतारी। भाइयों ने मिठाई खाई। बदले में उपहार दिए और बहनों की रक्षा का संकल्प लिया। वहीं कहीं पर पौधे को भी रक्षा सूत्र बांधा गया। इसी तरह नेताओं और अर्धसैनिक बलों को भी रक्षा सूत्र बांध कर पर्व मनाया गया।
बहनों ने भाइयों की कलाई सजाने के लिए एक से बढ़कर एक राखियां खरीद रखी थीं। गुरुवार की सुबह से ही बारिश शुरू हो गई। कभी रिमझिम तो कभी घनघोर बारिश हुई। लेकिन इससे बहनों के कदम नहीं रुके। बारिश में भीगते हुए बहनें भाइयों के पास पहुंचीं। सुबह से देर शाम तक राखी बांधने का मुहूर्त होने की वजह से सुबह ही भाई भी सुबह ही स्नान कर नए कपड़े पहन कर तैयार हो गए थे। बहनों ने थाल में रोरी, हल्दी, अक्षत, दीप और राखी सजायी। बहनों ने भाइयों की आरती उतारी और माथे पर कुमकुम का तिलक लगाया। इसके बाद कलाई पर राखी बांध कर उनके लंबी उम्र की कामना की। छोटे बच्चों में रक्षा बंधन को लेकर विशेष उत्साह दिखा। इस अवसर पर घरों में अच्छे अच्छे पकवान बनाए गए थे। जो बहनें दूर रहती हैं, उनकी राखी डाक के जरिये उनके घर पहुंची थी। चकिया नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में त्योहार परंपरागत ढंग से मनाया गया। नगर सहित सिकंदरपुर, शिकारगंज, सैदूपुर में पर्व का उत्साह रहा।