पीडीडीयू नगर। चंदौली से लखनऊ तक की सफर कराने वाली अत्याधुनिक राजधानी बसों को सवारी नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि कई दिनों तक वाराणसी से ये बसें बिना सवारी के ही खाली आ और जा रही हैं। जिससे रोडवेज को मुनाफा तो दूर खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। अधिकारी इसका सबसे बड़ा कारण ज्यादा दूरी को मान रहे हैं।उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सभी जिलों से दो राजधानी बसों को चलाने का एलान किया गया। इससे जनपद वासियों को भी काफी खुशी हुई। 6 मार्च से चंदौली में राजधानी बसों का संचालन शुरू हुआ। जिले में बस अड्डा न होने की वजह से सैयदराजा के रामलीला मैदान से इन बसों का संचालन हो रहा है। रोजाना शाम 6:30 बजे राजधानी बस रवाना होती है जो वाराणसी, जौनपुर, प्रतापगढ होते हुए लखनऊ पहुंचती है। लेकिन चंदौली से इसमें सवारी ही नहीं मिल पा रही है। किसी दिन एकाध सवारी मिल जा रहे है। अमूमन वाराणसी से ये बसें चंदौली खाली ही आ और जा रही हैं। इससे रोडवेज को नुकसान हो रहा है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार अगर इन दिनों का औसत निकाला जाए तो रोजाना औसतन 18 फीसद ही सवारी मिले हैं। इस बसों को सवारी न मिलने का सबसे बड़ा कारण वाराणसी से चंदौली की दूरी है। वाराणसी के कैंट से मालवीय पुल होते हुए चंदौली की दूरी मात्र 30 किमी है। लेकिन मालवीय पुल पर वाहनों के रोक के चलते ये बसें बाईपास, टेंगरा मोड़ होते हुए चंदौली जाती हैं जो कुल 62 किलोमीटर हो जाता है। यानि इन बसों को दोगुना सफर तय करना पड़ता है। इसकी वजह से इनका मात्र वाराणसी के लिए ही 101 रुपये किराया है। जबकि पीडीडीयू नगर के रास्ते लोग निजी संसाधनों से भी 40-50 रुपये में वाराणसी पहुंच जाते हैं। ऐसे में राजधानी की सवारी कोई नहीं कर रहा।
कोट
वाराणसी से टेंगरा मोड़ होते हुए चंदौली की दूरी ज्यादा होने से सवारी कम मिल रही है। अगर पीडीडीयू नगर की रूट रहती तो सवारी बढ़ती। हालांकि इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है, जो भी कमियां होंगी उसे दूर किया जाएगा।-उमाशंकर त्रिपाठी, एआरएम, चंदौली