मंगलवार को हुई बारिश ने ठंड में और इजाफा कर दिया। न्यूनतम पारा दस रहा।
जिससे
दिन में गलन बढ़ गई और लोग घरों में ही रहे। बाजारों में सन्नाटा दिखाई
पड़ा। पर यह बरसात गेहूं की फसल के लिए संजीवनी जैसी है। कृषि वैज्ञानिकों
का कहना है कि इस बार इससे गेहूं की बोआई बीस प्रतिशत तक प्रभावित हुई है।
पर पिछैती की खेती करने वाले किसानों के लिए यह बारिश लाभदायक है।
उधर
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर मंगलवार की देर शाम ठंड लगने से 65 वर्षीय वृद्ध
की मौत हो गई। जीआरपी ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। जीआरपी
इंस्पेक्टर त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि मृतक को देख कर भिखारी होने का
अनुमान लगाया गया है।
मौसम का मिजाज बदलने से ठंड व गलन में
जबर्दस्त इजाफा हुआ, जिसके चलते लोग पूरे दिन घरों के अंदर कैद रहे।
हालांकि सोमवार की सुबह से मौसम बदल गया था।
पूरे दिन रुक-रुक बारिश होती
रही। रात को भी निरंतर बारिश का क्रम जारी रहा। लोगों ने खुद को ठंड से
बचाने के लिए गर्म कपड़े व अलाव का सहारा लिया। हालांकि सार्वजनिक स्थानों
पर अलाव नहीं जलने से गरीब तबके के लोगों को ठंड के कारण काफी परेशानी
उठानी पड़ी। उधर कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी और कृषि वैज्ञानिक डा.
आरपीएस रघुवंशी का कहना है कि यह बूंदाबांदी गेहूं की फसल को भरपूर लाभ
पहुंचाएगी।
यदि ठंडक अगले एक पखवारे तक बरकरार रही तो गेहूं को फायदा
पहुंचेगा। साथ ही यह भी कहा कि हल्की बरसात से गेहूं की उत्पादकता तो
बढ़ेगी, लेकिन दलहनी व तिलहनी फसलों के लिए यह मौसम अनुकूल नहीं है। ऐसे
में सरसों की फसल पर माहो कीट का प्रकोप बढ़ जाएगा, जिससे दहलनी फसलें भी
प्रभावित होंगी।
बताया कि इस वर्ष का जलवायु पिछले तीन वर्ष की जलवायु से
भिन्न है। पिछले वर्ष 40 से 50 दिन ठंड पड़ी थी, जिसमें न्यूनतम तापमान
सात से नौ डिग्री और अधिकतम 19 से 20 डिग्री रहा था। लेकिन इस वर्ष अभी तक
न्यूनतम तापमान सात डिग्री से नीचे नहीं आया, जो गेहूं की फसल व जलवायु के
लिए उतना सही नहीं है। तापमान बढ़ने से ही इस वर्ष 20 प्रतिशत गेहूं की
बोआई कम हुई है।
विगत वर्ष यहां 90 से 95 हजार हेक्टेयर में गेहूं की
फसल बोई गयी थी। वहीं इस वर्ष 70 से 75 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही
गेहूं की बोआई की गई है। बताया कि विगत 20 दिन पूर्व बोई गई फसलों के लिए
यह बरसात अमृत के समान है।