पीडीडीयू नगर। कोरोना वायरस संक्रमण काल के विपरीत समय में जी जान लगाकर ड्यूटी कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों का जनवरी 2020 से जुलाई 2011 तक डीए बढ़ोत्तरी को रोक दिया गया है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों में आक्रोश है। यूनियन नेता इसको लेकर विरोध में उतर आए हैं। विभिन्न संगठनों ने प्रधानमंत्री सहित अन्य मंत्रियों को पत्र भेज कर इस फैसले को रोकने की मांग की है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाईज यूनियन के मंडल सचिव और इंडियन रेलवे इंपलाईज फेडरेशन के केंद्रीय कमेटी के सदस्य संतोष कुमार पासवान ने महंगाई भत्ता रोकने की कड़ी निंदा की है। कहा कि इस महामंदी में केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को छटनी करने वाले उद्योगपतियों को करोड़ो- अरबों रुपये का टैक्स, कर्ज माफ कर रही है और उसे पटरी पर लाने के लिए वेल आऊट पैकेज दे रही है। दूसरी तरफ मजदूर-कर्मचारी विरोधी नीतियां बना रही है। कहा कि कोरोना संक्रमण काल में निजी कंपनियों में हाथ खड़े कर दिए लेकिन रेल कर्मचारी दिन रात काम कर रहे है। ऐसे लोगों को इनाम देने के बजाए भत्ते की कटौती की जा रही है। यदि यह फैसला नहीं बदला गया तो आंदोलन किया जाएगा। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस नेता रमेश सिंह ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। कहा कि राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेज कर इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण काल में केंद्रीय कर्मचारी, राज्य कर्मचारी और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी लगातार जुटे हुए हैं। ऐसे कर्मचारी सम्मान और इनाम के योग्य है। दूसरी तरफ वेतन भत्तों में कटौती कर सरकार गलत निर्णय ले रही है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।