बता दें कि थर्मल स्कैनर खरीदने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई थी। पंचायत राज विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की ओर से एक ही कंपनी से थर्मल स्कैनर व पल्स आक्सीमीटर खरीदा गया है। इसके बदले निर्धारित से अधिक कीमत चुकाई गई। उपनिदेशक पंचायत वाराणसी एके सिंह ने मामले का खुद संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल से जांच कराने का आग्रह किया है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि अपर जिला पंचायत राज अधिकारी रामउदय यादव, वरिष्ठ लेखा लिपिक राजेश सोनकर, ब्लाकों के सहायक विकास अधिकारी व खंड विकास अधिकारियों ने कंपनी के साथ मिलीभगत कर संसाधनों की खरीद में अनियमितता की है।
कंपनी व खुद को लाभ पहुंचाने के लिए शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया है। डीएम ने मामले की जांच के लिए उद्योग उपायुक्त गौरव मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी ब्रह्मचारी दुबे और वित्त व लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा) की तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
निगरानी समितियों के लिए थर्मल स्कैनर खरीदने में वित्तीय अनियमितता की उपनिदेशक पंचायत ने आशंका जताई है। प्रकरण की जांच करने के लिए तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है। कमेटी में शामिल अफसरों को दस दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। - नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी।