चंडीगढ़ में यूनिवर्सल स्टेशनरी में चोरी
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अप्रैल में शिक्षा सत्र की शुरुआत हुई हो लेकिन किताब, कापियों, बैग आदि की बिक्री जुलाई माह में गर्मी की छुट्टियों बीतने पर स्कूल खुलने के बाद तेज हो गई है। नए सत्र में किताब कापी ही नही स्कूली बैग, लंच बाक्स, पानी की बोतल, ड्रेस आदि पर महंगाई का असर दिख रहा है। सभी सामान की कीमत पंद्रह से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है। सबसे खराब हाल निजी विद्यालयों का है। यहां पैकेज सिस्टम लागू हो गया। दस से बीस हजार के पैकेज पर एक वर्ष तक के किताब, कापी, पेंसिल आदि दी जा रही है। कुल मिलाकर बच्चों की शिक्षा के लिए अभिभावक जमकर लुट रहे हैं।
परिषदीय और माध्यमिक विद्यालय दो जुलाई को खुल गए। आठवीं तक के अधिकतर विद्यालयों में निशुल्क पाठय पुस्तकें नही बंटी है। वहीं माध्यमिक विद्यालयों की किताबें बाजार में आ गई है। सीबीएसई बोर्ड की कक्षाएं भी नियमित शुरू हो गई और अभिभावकों की भीड़ दुकानों पर किताब कापियों को खरीदने के लिए जुटने लगी है। उत्साह के साथ दुकानों पर पहुंचने वाले अभिभावकों के होश किताब कापियों की दर सुनकर उड़ जा रहे हैं। हिंदी माध्यम के माध्यमिक विद्यालयों की सरकारी पुस्तकों की कीमत भी दस प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
वहीं सीबीएसई बोर्ड की किताबों की कीमत बीस से 25 फीसदी तक बढ़ी है। कापी की कीमत में भी पंद्रह से बीस फीसदी का इजाफा हुआ है। स्कूली बैग, लंच बाक्स, पानी की बोतल, ड्रेस भी बीस से पचीस प्रतिशत तक महंगेे हुए हैैं। इस संबंध में किताब कापी विक्रेता कृष्णा गुप्ता कहते हैं कि अन्य वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कम कीमत बढ़ी है।