पीडीडीयू नगर। चार परिवारों के लिए बुधवार की रात कातिल साबित हुई। नगर के लाठ नंबर दो स्थित एक घर में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान मात्र दस मिनट में एक-एक कर चार लोगों की मौत हो गई। मौके पर मौजूद चौथे सफाईकर्मी ने अमर उजाला से आंखों देखा हाल बताया। कहा कि जहरीली गैस ने अंदर जाने वालों को चीखने तक का मौका नहीं दिया। एक साथ चार लोगों की मौत से क्षेत्र में मातम छाया हुआ है। हादसे में जान गंवाने वाले सफाईकर्मियों का चौथे साथी दीपू ने बताया कि रात में करीब दस बजे वह कुंदन, सुमित ऊर्फ लोहा और विनोद सेप्टिक टैंक सफाई के लिए भरत लाल जायसवाल के घर पहुंचे थे। बताया कि उन्होंने से सबसे पहले सेप्टिक टैंक का ढक्कन खोला ताकि सारी गैस बाहर निकल जाये। इसके बाद उसमें फिनाइल डाला। इसके बाद उन्होंने कनस्तर के माध्यम से सिल्ट को निकालाना शुरू किया। बताया कि रात 12 बजे तक उन्होंने आधे से ज्यादा टैंक खाली कर दिया था। इसके बाद टैंक से सिल्ट निकालने के लिए सबसे पहले सुमित को टैंक में उतारा गया। दो कनस्तर सिल्ट बाहर निकाला गया।इसके बाद सुमित ने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर टैंक से बाहर निकालने का इशारा किया। इस पर दीपू और कुंदन ने सुमित की बांह पकड़कर उसे बाहर खींचने लगे। इसी बीच कुंदन टैंक में गिर गया और सुमित भी उसके हाथ से छूट गया। दोनों साथियों को बचाने के लिए विनोद भी टैंक में उतर गया। तीनों लोगों के टैंक में जाने के बाद बाहर नहीं निकले से हड़कंप मच गया। इसके बाद भरत लाल का पुत्र अंकुर जायसवाल सफाईकर्मियों को बचाने के लिए खुद को रस्सी से बांध लिया और टैंक में उतरने लगा। इसी बीच उसकी रस्सी खुल गई और वह भी टैंक में गिर गया। दीपू ने बताया कि दस मिनट में एक-एक कर चारों लोग टैंक में समा गए। उसने फोन करके सन्नी, वीरेंद्र और मनोज को बुलाया। दीपू ने बताया कि मौके पर पहुंचे तीनों लोगों ने टैंक में सीढ़ी लगाकर चारों को बाहर निकाला। इसके बाद विनोद को उसके परिवार वाले ट्रामा सेंटर ले गए। बाकी तीनों को लोग जिला अस्पताल ले गये। चिकित्सकों ने विनोद, सुमित, कुंदन और अजय को मृत घोषित कर दिया।