नौगढ़ विकास खंड परिसर सभागार में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया
गया। सोमवार को रात्रि आठ बजे अतिथि अजवेंद्र कश्यप व वनक्षेत्राधिकारी
शमशुलहुदा सिद्दीकी ने दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
कवि
शिवदास ने कहा कि जनमानस के साथ प्रकृति करे लगल मनमानी कहां गयल विज्ञान
बेचारा कहा कि बरसो पानी। वरिष्ट कवि शिक्षक नागेश शाडिल्य ने खचाखच भरे
हास्य की फुहार बिखेरते हुए कहा कि मेरी कमाई जा रही है कौन कहता है
लक्ष्मी आ रही है।
पंडित धर्मप्रकाश मिश्र की रचना प्यार से आते तो दिल
में आप रहेंगे, न शोक रहेगा और न संताप रहेगा।
ख्यातिलब्ध शायर अख्तर
बनारसी ने शायरी को ऊंचाई देते हुए पढ़ा हवा धूप पानी चाहता है एक पौध
जिंदागानी चाहता है। खूब सराही गई।
हास्य के धुरंधर कवि फजीहत गहमरी ने
अपने चुटकलेदार कविताओं से श्रोताओं को हंसाते हंसाते लोट पोट कर दिया।
अपनी दिलकश अदाओं से निमंत्रण मुक देती है गिरा के हुस्न की बिजली मेरा
दिल फूक देती है करूं मैं किस तरह से इश्क का इजहार तुम बोलों में उसको
फूल देता हूं वो मुंह पर थुक देती है।
आधा आबादी के रूप में इकलौती
कवियत्री विभा शुक्ला ने नारी वेदना पर कई गीत पढ़े और वाहवाही बटोरी।
उसकी एक रचना किसी के दिनमें बसती हूं किसी से दूर रहती हो खूब सराही गई।
शायर सलीम शिवालवी की रचना यात्राएं गहमरी ने अपने हिस्से की रचना पढ़ते
हुए कहां कि धरती पर जलाओं कि गगन में करो रौशन नफरत के चिरागों से उजाला
नहीं होता। यह रचना खूब जमी। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सलीम शिवालवी व
संचालन मिथिलश गहमरी ने किया।
यह आयोजन एक समाचार पत्र की 12वीं वर्षगांठ
पर किया गया। स्थापना दिवस समारोह में गांव की माटी से जुड़े समाजसेवी जगत
नारायण, डायरेक्टर मानव सेवा केंद्र, ग्राम प्रधान राजू, फूलगेंद, बसंतु
को अंग वस्त्रम एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में
थानाप्रभारी रामनारायण पासी, रामप्रसाद यादव, बृजेश केशरी, राकेश
श्रीवास्तव, अतुल मिश्रा, वीरेंद्र कुमार, सुरेंद्र तिवारी, राजू केशरी,
डा. सुधीर, आदि मौजूद रहे।