चकिया। चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था की ओर से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने संस्था के संस्थापक रामजियान दास बावला को काव्यमय श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरूआत रामअलम सिंह ने वाणी वंदना से की।
गोष्ठी में पीके निर्मल ने ‘सर्दी खांसी पहले फिर जुखाम होई’ राजेंद्र प्रसाद भ्रमर ने ‘फइलल कोरोना के सगरो बीमारी’ सुनाकर लोगों को जागरूक किया। राजेश विश्वकर्मा उर्फ राजू ने ‘बहुत जानलेवा है करो ना बीमारी खतरनाक फैली है ये महामारी’बंधु पाल बंधु ने ‘तनी होशियारी से रही है’ हरिवंश सिंह बवाल ने ‘आयल वायरस को रोना महामारी मितवा’ रामअलम सिंह ने ‘जीवन जी आयल अइसन को रोना बीमारी’ सुनाकर लोगों को रसासिक्त किया। संतोष कुमार धूर्त ने सास बहू का झगड़ा देखो रोज-रोज का पचरा देखो, डॉ. सुरेंद्र सिंह ने दोस्तों की क्या कहे जब मीत हमको छल गया, डॉ. राकेश अनुरागी ने परिंदा हूं मैं जीवन का उड़ना शक्ति है मेरी ,सुखराम भाई गजरा ने खुद की हिफाजत खुद से होना है सुनाकर लोगों को भाव विभोर किया। इस मौके पर डॉ. रामकिशोर शर्मा बेहद, राजेंद्र प्रसाद भ्रमर, अलियार प्रधान, राम अवध सिंह, तेजबली अनपढ़, वसीम अहमद, प्रदीप पाठक, सूर्यांश विश्वकर्मा, मनीष केसरी आदि ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता बेचई सिंह मालिक ने और संचालन हरिवंश सिंह बवाल ने किया।