क्षेत्र के बलुआ स्थित महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली पर पश्चिमवाहिनी गंगातट
पर मौनी अमावस्या पर लाखों की संख्या में लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई।
दिन
भर गंगा तट हर हर महादेव और जय गंगा मइया के जयकारे लगते रहे। स्नान के
बाद लोगों ने दानपुण्य किया और मेले का आनंद उठाया। जिले ही नहीं प्रदेश के
कोने कोने से लोग भी गंगा में स्नान करने पहुंचे। स्नान ध्यान का सिलसिला
सुबह से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा।
भीड़ को संभालने में पुलिस को काफी
मशक्कत करनी पड़ी। एक अनुमान के अनुसार पांच लाख लोगों ने यहां पर स्नान
किया।
मौनी अमावस्या पर बलुआ गंगा घाट पर भीड़ को देखते हुए प्रशासनिक
तैयारी एक पखवारा पहले से शुरू हो गई थी। लेकिन जब भीड़ जुटी तो सारी
व्यवस्थाएं धरी की धरी रह गई।
चहुंओर अव्यवस्थाओं का आलम रहा। बावजूद इसके
आस्थावानों के चेहरे पर कोई चिंता नहीं दिखी। अव्यवस्थाओं के बीच वे आस्था
की गंगा में डुबकी लगाते रहे। अमावस्या सोमवार को होने के चलते स्नान का
महत्व और बढ़ गया। यही कारण है कि रविवार को ही स्नान के लिए यहां लोगों के
आने का सिलसिला शुरू हो गया।
आधी रात के बाद लोगों ने हर हर महादेव और जय
गंगा मइया के जयकारे के बीच लोग गंगा घाट पहुंचने लगे। इस दौरान घाट पर
वृहद मेला लगा।
यहां स्नान के बाद लोगों ने मेले का आनंद उठाया और घर
गृहस्थी के सामानों की खूब खरीददारी की। गंगा घाट पर झूलों के साथ ओखली,
मूसल, सील लोढ़ा, चकिया, जाता, शृंगार की वस्तुओं की दूकानें सजी रहीं।
झूले और चरखी का बच्चों ने जमकर लुत्फ उठाया। चाट पकौड़े के साथ झूलों के
पास बच्चों की सर्वाधिक भीड़ रही। इसके बाद खिलौनों की दूकान पर लोग जुटे।
वहीं गुड़ही जलेबी, पकौड़ी की दुकानों पर खूब भीड़ जुटी।
मेले में सुरक्षा
व्यस्था की स्थिति चुस्त दुरुस्त रही। घाट पर बैरीकेडिंग की गई और गोताखार
नौका से गंगा में भ्रमण करते रहे। सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह कैंप
लगाकर लोगों की सहायता की गई, चाहे वह प्राथमिक उपचार की व्यवस्था हो अथवा
खोया पाया केंद्र।
लगातार माइक से लोगों को मेले की जानकारी दी जा रही थी।
चहनियां शिव मंदिर पर प्रधान भजुराम की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम का
आयोजन किया गया। इसमें वाराणसी से आए अग्निनरायन त्रिपाठी ने भक्तिमय गीतों
से लोगों का खूब मनोरंजन किया।