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वर्षो से अधर में लटकी हुई है नहर के सुदृढ़ीकरण की योजना

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चकिया। लतीफशाह बीयर से निकली चकिया, शहाबगंज तथा चन्दौली विकास खंड के 35 हजार हेक्टेयर खेतों की सिंचाई करने वाली मुख्य नहर हेड से डेढ़ किलोमीटर तक सोरियों के चलते बदहाल है। नहर की तली तथा दोनो बैंक की आरसीसी ढलाई किये जाने का 11 करोड़ का प्रस्ताव पिछले एक दशक से सरकारी कार्यालयों की फाइलों में धूल फांक रहा है। कई बार सिंचाई के पीक आवर में नहर टूट चुकी है। इससे किसानों को भारी खामियाजा भी भुगतना पड़ा है। प्रति वर्ष कार्ययोजना की लागत बढ़ रही है। जिससे किसानों में भारी नाराजगी है।
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लतीफशाह बीयर से निकली लेफ्ट कर्मनाशा माइनर का डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा वन क्षेत्र के अंदर आता है। वन क्षेत्र के बड़े पेड़ों की जड़ों तथा केकड़ों की बहुतायत के चलते माइनर का यह हिस्सा पूरी तरह छलनी है। बरसात के दिनों में नहर में पानी छोड़े जाने पर पानी दबाव के कारण पिछले एक दशक में चार बार नहर हेड पर टूट चुकी है। जिसकी मरम्मत में 15 से 30 दिन तक का समय लग चुका है। ऐसी स्थिति में नहर को फुल गेज से चलाना संभव नही है। जिसके कारण टेल के किसानों को सिंचाई के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
प्रस्ताव नहीं स्वीकृत हुआ है
चकिया। नहर की बदहाल हालत को देखते हुए एक दशक पूर्व नहर के डेढ़ किलोमीटर के हिस्से को तली सहित आरसीसी ढलाई कराने का कुल 11 करोड़ का प्रस्ताव चन्द्रप्रभा प्रखंड की ओर से उच्चाधिकारियों को भेजा जा चुका है। लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता एवं जन प्रतिनिधियों के रुचि नहीं लेने के चलते यह प्रस्ताव अभी तक मूर्त रूप नही ले सका है। किसान जयराम सिंह, लालचंद सिंह, गौरव श्रीवास्तव, मंगला राय, भगवान सिंह सहित तमाम किसानो ने हेड से डेढ़ किलोमीटर तक आरसीसी कराकर कर्मनाशा लेफ्ट माइनर के किसानों को राहत देने की मांग की है। चन्द्रप्रभा प्रखण्ड के अधिशासी अभियंता सुरेश चन्द्र आजाद ने कहा कि विभाग द्वारा 11 करोड़ के प्रस्ताव को कई बार संशोधित किया जा चुका है।
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