पीडीडीयू नगर। भीषण गर्मी शुरू होते ही जिले में पानी का संकट गहराने लगा है। खास तौर से वनांचल में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, पेयजल की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए तरस जाना पड़ रहा है। करीब एक दर्जन ऐसे गांव हैं, जहां हैंडपंपों ने जवाब देना शुरू कर दिया है या पानी आना बंद हो गया है। इसके चलते करीब छह से सात हजार की आबादी प्रभावित है।
उधर, चंद्रप्रभा बांध के पास कई ऐसे परिवार हैं, जिनके सामने पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। वनवासी बंधी के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। चकिया, नौगढ़ और शहाबगंज ब्लाॅक के ऐसे गांव जो बिहार बाॅर्डर या पहाड़ियों के बीच बसे हैं, वहां गर्मी शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों को पेयजल की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है। वनवासियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में भूगर्भ जलस्तर नीचे जाने की वजह से हैंडपंप पानी छोड़ देते हैं। कई चुआड़ और झरने भी सूख जाते हैं। इसके चलते लंबी दूरी तय करके ग्रामीणों को पानी का इंतजाम करना पड़ता है। रविवार को चंद्रप्रभा क्षेत्र के राजदरी जलप्रपात के पास नौगढ़ ब्लॉक के धूसुरिया गांव निवासी सोनम नामक बच्ची व उसकी छोटी बहन ने बांध से आकर जलप्रपात के पास इकट्ठा होने वाला पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। धूसुरिया गांव की रहने वाली गीता देवी, दयसिर वनवासी, सियाराम वनवासी ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में पानी समाप्त हो चुका है। किसी तरह आसपास कुछ दूरी से डिब्बा व बर्तन इत्यादि में पानी लाकर इकट्ठा करके रख लिया जाता है। उसी से सारे घर का काम होता है।एसडीएम दिव्या ओझा का कहना है कि वनांचल में भूगर्भ जलस्तर नीचे चले जाने से कई गांवों में हैंडपंप और पानी की टंकियां खराब होने की वजह से ग्रामीणों को काफी दिक्कतों का सामना करने की शिकायत प्राप्त हुई है। समस्या काफी गंभीर है। वनांचल के लोगों को पानी की जरूरत है। जल्दी ही पानी का टैंकर गांव-गांव भिजवाकर समस्या से निजात दिलाई जाएगी।