पीडीडीयू नगर। जिले के लोगों को शुद्ध पानी देने की बात तो दूर 40 से ज्यादा गांवों के 30 हजार से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिन्हें पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। नियामताबाद विकासखंड के रतनपुर, भोजपुर सहित चहनिया विकासखंड और नौगढ़ के कई गांवों में न तो पानी का कनेक्शन है और न ही हैंडपंप है। कुछ लोग सबमर्सिबल लगवाएं हैं उसी से पानी लेकर लोग काम चलाते हैं।। वहीं ज्यादातर लोग कुएं आदि से पानी लेते हैं।
नियामताबाद विकासखंड के रतनपुर-भोजपुर ग्राम पंचायत की आबादी 10 हजार के करीब है। यहां के लोगों केा आजादी के बाद से आजतक पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। जबकि यह गांव वाराणसी की भी सीमा से सटा हुआ है। तीन साल पहले जल निगम की ओर से गांव में पानी की पाइपलाइन बिछाई गई ओर पानी की टंकी भी बनाई गई लेकिन फिर यह योजना पूरी होने से पहले ही बंद हो गई। करीब 30 लाख रुपये की राशि पानी में बह गया लेकिन लोगों को आजतक पानी नहीं मिला है।
रतनपुर के लोग वाराणसी के सूजाबाद डोमरी से नल का पानी भरकर लाते हैं वहीं जिन लोगों के घर सबमर्सिबल है उनके घरों से पानी ढोकर लाते हैं। इसके लिए प्रदर्शन भी हो चुका है लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
चहनिया। विकासखंड के सराय गांव की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है। यहां एक दशक पहले पानी की टंकी तो बनी, लेकिन उसका संचालन कभी शुरू ही नहीं हो सका। गांव के हैंडपंप भी खराब हैं, जिससे लोग कुओं और निजी बोरिंग के भरोसे जी रहे हैं। वहीं सोनबरसा गांव में भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
ताराजवीनपुर। सकलडीहा क्षेत्र के सरेसर, आलमपुर, नसीरपुर पट्टन, जलालपुर, महादेवपुर रेवसा, गंजख्वाजा, सदलपुरा और सहरोई गांवों में पानी नहीं पहुंचा है। जीवनपुर गांव सभा में पानी टंकी से सप्लाई तो शुरू की गई, लेकिन पानी इतना दूषित है कि लोग इसे पीने तो दूर स्नान तक के लिए उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
धीना। बरहनी विकासखंड के कम्हारी, बाबूरा खुर्द, सबल, जलालपुर, बैरी खुर्द और रहपुरी गांवों में जल जीवन मिशन की पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन टेस्टिंग के दौरान जगह-जगह से पाइप फटने और लीकेज होने पर जलापूर्ति रोक दी गई। ग्राम प्रधान दिनेश यादव ने बताया कि शिकायतें कई बार डीजीएम, जलकल विभाग और ठेकेदार को दी गईं, पर कोई सुधार कार्य नहीं हुआ। ऐसे में आजादी के बाद पेयजल आपूर्ति का सपना सपना ही रह गया है।
कंदवा। क्षेत्र के भदखरी गांव में करीब एक हजार की आबादी आज भी पेयजल सुविधा से वंचित है। ग्रामीण विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि पानी सबसे प्राथमिक जरूरत है लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। जब शुद्ध पीने का पानी नहीं मिल रहा फिर अन्य कार्य की क्या बात कही जाए।
रतनपुर और भोजपुर गांव के 10 हजार से ज्यादा लोग आज भी पानी के लिए तरस रहे हैं। पानी के लिए जुगाड़ के सहारे हैं।-रामलाल पटेल, रतनपुर
रतनपुर-भोजपुर गांव वाराणसी से सटा हुआ है लेकिन यहां विकास की बात तो दूर पानी तक लोगों को मयस्सर नहीं है। सुबह सबसे पहले पानी की ही चिंता सताती है।-गुड़िया श्रीवास्तव
गांव में सबसे ज्यादा दिक्कत उन गरीब परिवारों को होती है जिनके घर समरसेबल नहीं। वे कई घरों से अनुरोध कर पानी भरते हैं या फिर लंबी दूरी तय करते हैं।-अवधेश मौर्य, रतनपुर
पानी जैसी प्राथमिक चीज नहीं है और कोई पुरसाहाल नहीं है। पेयजल के नाम पर लाखों रुपये की पाइपलाइन बिछाई गई। टंकी का काम भी बंद हो गया। योजना भी बंद हो गई।-अरूण कुमार, भोजपुर
रतनपुर-भोजपुर में पानी की व्यवस्था के लिए जल निगम ने पहल की थी लेकिन वह योजना बंद हो गई। उसकी जांच कराई जाएगी। गांव के लोगों को पानी की मिल सके इसकी व्यवस्था की जाएगी।-रूबेन शर्मा, बीडीओ, नियामताबाद
रतनपुर-भोजपुर गांव में पानी की समस्या को देखते हुए पाइपलाइन बिछाई गई थी और पानी की टंकी का निर्माण भी कराया जा रहा था। इसमें करीब 30 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, इसके बाद गलत चयन की वजह से ऊपर से आदेश आने के बाद काम बंद कर दिया गया।बृज बिहार, जेई, जलनिगम