विंध्य पर्वत श्रृंखला की कचरिया पहाड़ी पर आयोजित समारोह में सोमवार को
श्रीलंका से आए बौद्ध भिक्षुओं ने पूजन अर्चन किया। इस दौरान पंचशील ध्वज
फहराया गया।
इससे समूचा पहाड़ी इलाका बुद्धं शरणं गच्छामि के मंत्र
से गूंज उठा। इस मौके पर बौद्ध भिक्षुओं ने आज के समय में बौद्ध विचारों
के प्रसार की आवश्यकता जताई।
श्रीलंका के धम्मगुरु डॉ.पी शिबली एवं
धम्मगुरु बुद्ध ज्योति के साथ अनेक बौद्ध भिक्षु दोपहर बाद कचरिया पहाड़ी
पर उकेरे गए भगवान बुद्ध के शैल चित्र के समीप पहुंचे और बौद्ध रीति रिवाज
से पूजन अर्चन किया।
इस दौरान डॉ. पी शिबली ने कहा कि भगवान बुद्ध शांति के
पुजारी थे। हिंसा को रोकने के लिए उन्होंने जीवों पर दया करो का संदेश
मानव समाज को दिया। करुणा और मैत्री का संदेश देकर उन्होंने मानव समाज को
नेक राह पर चलने की भी प्रेरण दी। धम्म गुरु बुद्ध ज्योति ने कहा कि आज
समाज पूरी तरह से दूषित हो गया है।
ऐसे में भगवान बुद्ध के संदेशों को
अपनाने की महती जरूरत है। किसान विकास मंच चंदौली के अध्यक्ष जयराम सिंह ने
कहा कि भगवान बुद्ध ने नरसंहार, हत्या जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए जो
संदेश मानव समाज को दिया है। वृक्षबंधु परशुराम सिंह ने कहा कि भगवान बुद्ध
का जीवन सर्वसमाज के लिए समर्पित था।
इस दौरान उन्होंने पीपल का पौधा
लगाया। इस क्रम में उन्होंने कचरिया पहाड़ी के समीप आम का पौधा भारी मात्रा
में लगाने की भी घोषणा की। मेधांकर जी ने कचरिया पहाड़ी पर भगवान बुद्ध की
प्रतिमा स्थापित करने के लिए पांच फीट की प्रतिमा देने की घोषणा की। गायक
श्यामनारायण यादव, लोकगीत रमाशंकर यादव ने गीत सुनाकर माहौल भक्तिमय बना
दिया।
मूसाखांड के पूर्व ग्राम प्रधान शंभू यादव ने बच्चों को पढ़ाई
लिखाई करने के लिए कापियां वितरित कीं। इस अवसर पर न्यूजीलैंड से आए
क्यूनट्रेस, धम्मपुत्र भनगोई, डा.बुद्ध प्रताप मौर्य, शकुंतला मौर्य,
नारायन, कमलेश यादव, भगमानी देवी, कृष्णावती देवी, जयराम मौर्य, डा.
महेंद्र कुमार, घनश्याम कवि, लालजी प्रसाद, वासुदेव, नंदलाल, दशरथ, हरि
प्रसाद, रामअधार मौर्य आदि उपस्थित रहे।