सकलडीहा। कृषि विभाग ने पराली को खाद में तब्दील करने की विधि खोज निकाली है। इसके लिए दो किलो गुड़ वेस्ट डी कंपोजर रासायनिक दवा में मिलाकर इस जैविक घोल को कटाई के बाद पराली पर छिड़काव से न सिर्फ पराली खाद के रूप में तब्दील हो जाएगी बल्कि जलाने से भी निजात मिल जाएगी। खाद बनने से खेत की उत्पादन क्षमता में वृद्धि के साथ बीज को उपचार और हरी फसल को टॉनिक मिलेगा। कृषि विभाग की इस पहल से किसानों पर होने वाला मुकदमा भी बंद हो जाएगा।
कृषि उपनिदेशक राजीव भारती ने बताया कि खेतों में पराली जलाने से जहां मिट्टी की जीवाश्म समाप्त हो जाता है वहीं उत्पादन क्षमता भी कम हो जाती है। इस समस्या के समाधान के लिये प्रदेश सरकार की ओर कृषि विभाग ने जैविक घोल के माध्यम से पराली को खाद में तब्दील करने की विधि खोज ली है। प्रत्येक बीज गोदाम पर मात्र 20 रुपये में वेस्ट डी कंपोजर की दवा और दो किलो गुड़ 200 लीटर पानी में डालकर जैविक घोल तैयार किया जा सकता है। दो सौ लीटर जैविक घोल से करीब दो हेक्टयर खेतों की पराली को खाद में तब्दील किया जा सकेगा।
इनसेट.........
हरी फसल के लिए टॉनिक का काम करेगा घोल
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फसल की कटाई से एक सप्ताह पूर्व घोल तैयार कर कटाई के बाद तुरंत छिड़काव करने से पराली एक सप्ताह में खाद में तब्दील हो जाएगी। बोआई और जोताई में किसी प्रकार की समस्या भी नहीं होगा। इस विधि से पहले वर्ष 25 से 30 प्रतिशत की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। वहीं दूसरी ओर डीएपी और यूरिया की मात्रा भी कम होगी। वहीं हरी फसल पर घोल का छिड़काव टॉनिक का काम करेगा।