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Chandauli News: कारपेट एक्सपो के चेयरमैन से 20 नवंबर तक वसूली करने का आदेश

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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इंडिया कारपेट एक्सपो के चेयरमैन के खिलाफ जारी आदेश के अनुपालन में देरी पर नाराजगी जताई है।
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जिलाधिकारी को भेजे पत्र में उपभोक्ता आयोग ने कारपेट एक्सपो चेयरमैन से भू राजस्व की भांति वसूली का निर्देश दिया है। कहा कि पूर्व निर्देश और भदोही तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस के बाद भी वसूली में देरी से कोर्ट की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि भदोही के मर्यादपट्टी निवासी कालीन निर्यातक एसपी गुप्ता की शिकायत के बाद उपभोक्ता आयोग ने पांच अगस्त, 2024 सीईपीसी चेयरमैन से 4.70 लाख रुपये वसूली का आदेश दिया था। उन्होंने पीड़ित को 12 फीसदी वार्षिक की दर से वसूली का आदेश दिया।
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उनके अनुसार 2004 में नई दिल्ली में होने वाले कालीन मेले के लिए उन्होंने 45 हजार रुपये देकर स्टॉल बुक कराए थे। सीईपीसी की ओर से उन्हें 93 नंबर स्टॉल प्राप्त हुआ।
जब वे सारा सामान लेकर फेयर में पहुंचे तो वहां उनके स्टॉल पर कोई और अपनी दुकान लगाया था। इसकी शिकायत उन्होंने आयोजक समिति व सीईपीसी चेयरमैन से की। इसके बाद उन्हें वहां 46 नंबर स्टॉल दिया जाने लगा, जिसे उन्होंने नहीं लिया।
इसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग जाने पर भी सीईपीसी को राहत नहीं मिली। इसके बाद उपभोक्ता आयोग ने 5 दिसंबर 2024 को वसूली अधिपत्र जारी किया था। इसमें तहसीलदार भदोही को संबंधित से भूराजस्व की भांति वसूली के निर्देश थे। अनुपालन न होने पर तहसीलदार भदोही को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन अब तक कोई वसूली न होने पर उपभोक्ता आयोग ने डीएम को पत्र लिखकर एतराज जताया है। कहा कि राजस्व अधिकारियों की उदासीनता से उपभोक्ता अदालत की कार्यवाही में बाधा आ रही है। आयोग ने जिलाधिकारी से अधीनस्थ अधिकारियों को उचित निर्देश देने को कहा है।
बुधवार को उपभोक्ता आयोग ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर कारपेट एक्सपो चेयरमैन से जुर्माने के आधार पर अब 14.83 लाख रुपये वसूलने का आदेश दिया। चेताया कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना पर एक माह से तीन वर्ष तक का कारावास या पच्चीस हजार रुपये से एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
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उन्होंने इस आशय का पत्र प्रमुख सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को भी सूचित किया गया है। इसके अलावा प्रमुख सचिव, न्याय एवं विधि परामर्शी, उत्तर प्रदेश शासन, अध्यक्ष, राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश और आयुक्त, विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर को भी भेजी है। कोर्ट ने 20 नवंबर, 2026 तक हर हाल में पूरी धनराशि जमा कराए जाने का निर्देश दिया है।
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