शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद जनपद के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग एक लाख बच्चे बुधवार को दूध से वंचित रह गए।
जिले
के 1550 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 1156 विद्यालयों में
ही खाने के साथ दूध वितरित किया गया। शेष 394 विद्यालयों में दूध का वितरण
नहीं हो पाया। शासन ने बुधवार को बच्चों के बीच दूध वितरण का निर्देश दे
रखा है।
गौरतलब है कि कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों के बीच बुधवार
को दूध वितरित करने के लिए शासन ने फरमान तो जारी कर दिया है। लेकिन
कनवर्जन कास्ट नहीं बढ़ाई गई है। इससे कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और
प्रधानों ने दूध वितरण करने में अपने हाथ खड़े कर लिए हैं।
प्राथमिक
विद्यालयों में प्रति छात्र 3.59 रुपये और उच्च प्राथमिक में 5.38 रुपये की
दर से कन्वर्जन कास्ट निर्धारित है। प्रत्येक बुधवार को वितरित किए जाने
वाले दूध के लिए कोई अलग से शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। जबकि दूध 35
से 40 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है।
यही कारण है कि कई विद्यालय
बच्चों को दूध नहीं पिला पा रहे हैं। हालांकि बच्चों को दूध वितरित करने के
लिए शासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग से
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार बुधवार को जनपद के 74.58 प्रतिशत विद्यालयों में
ही दूध का वितरण किया गया। यानी कुल 1550 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक
विद्यालयों में से 1156 विद्यालयों के एक लाख पांच हजार दो सौ एक बच्चे ने
दूध पिया।
लेकिन शेष बचे विद्यालयों के लगभग एक लाख बच्चे दूध पीने से
वंचित रह गए। गौरतलब है कि जिले में कुल दो लाख 33 हजार 668 बच्चे स्कूलों
में नामांकित हैं। बेसिक शिक्षाधिकारी पीसी यादव ने बताया कि सभी खंड
शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर हाल में विद्यालयों में
दूध का वितरण करवाएं।
बुधवार को विद्यालयों का सघन निरीक्षण भी किया गया।
जो विद्यालय किसी कारणवश दूध का वितरण नहीं करा रहे हैं, उन्हें कड़ी
चेतावनी दी गई है। अगर दोबारा दूध न मिलने की शिकायत कहीं से भी आती है तो
संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।