पीडीडीयू नगर। लोक आस्था का महापर्व चैती छठ का समापन शुक्रवार को हुआ। व्रती महिलाओं ने परिवार के साथ सरोवर तटों पर पहुंच कर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद 26 घंटे का उपवास तोड़ा। इस दौरान घाटों पर उगीं न सुरूज मल भइले अरग के बेर, अन धन मांगिला आदि गीत गुंजायमान रहे। वहीं अर्घ्य दिलाने वालों का तांता लगा। वहीं सुहागिन महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया।
चार दिवसीय डाला छठ के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को व्रतियों ने अस्ताचल गामी सूर्य को अर्घ्य दिया। वहां से घर पहुंच कर पूरी रात उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी की गई। सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पकवान आदि तैयार किए गए। भोर में व्रती महिलाओं ने अर्घ्य के लिए दउरी और सूप में फल, पकवान, पूजा सामग्री आदि को सजाया। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य नए कपड़े पहन कर तैयार हो गए। इसके बाद व्रती महिलाएं हाथों में कलश लेकर चलीं।
पुरुष सदस्य सिर पर फल और पूजन सामग्री वाले सूप और दउरी लेकर चले। नगर के मालगोदाम पोखरा, मानसरोवर तालाब, दामोदरदास पोखरा सहित अन्य घाटों पर व्रती पहुंचे। यहां कलश स्थापित कर पूजा अर्चना की। इसके बाद सूर्य के उदय होने का इंतजार किया। जैसे ही आसमान में सूर्य की लालिमा दिखी। व्रतियों ने दूध और जल से भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। चहनियां संवाददाता के अनुसार लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पश्चिम वाहिनी गंगा घाट बलुआ में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा पूर्वक मनाया। शुक्रवार की सुबह महिलाएं ढोल नगाडे़ और बैंडबाजा के साथ गंगा घाट पर पहुंची। यहां उदयाचल सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और संतान सुख की कामना की।
इस दौरान गंगा घाट पर स्थानीय युवकों और सामाजिक संगठनों ने व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाए रखने में अहम योगदान दिया। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए। गंगा घाट पर पुलिस बल, होमगार्ड, सिविल डिफेंस आदि तैनात रहे। गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल के नेतृत्व में गंगा सेवक घाट पर पूरी मुस्तैदी के साथ डटे रहे।