स्थानीय लाल बहादुर शास्त्री स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को देश की वर्तमान स्थिति और नोट बंदी का प्रभाव विषय परिचर्चा हुई। इसमें अर्थशास्त्र के जानकारों ने इसे दूरगामी परिणाम वाला बताया। कुछ ने इसे बहुत अच्छा तो कुछ ने इसमें सुधार की आवश्यकता बतायी।
परिचर्चा में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. श्याम कार्तिक मिश्र ने कहा भारत के इतिहास में आठ नवंबर एक महत्पूर्ण दिन के रूप में याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री के फैसले से आम लोगो को दिक्कत हो रही है लकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे। अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुरेन्द्र मिश्र ने कहा कि मोदी जी का यह प्रयास कितना सफल होगा और कितना असफल यह तो वक्त बतायेगा लेकिन यह तय है कि देश पूंजीवाद एवं इंपीरियलिज्म (साम्राज्यवाद) के चंगुल में फंसता दिखायी दे रहा है। राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ तरूण कुमार ने कहा कि ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल नोटबंदी के प्रतीक मात्र हैं और यह सरकार निश्चित रूल्प से कुछ न कुछ अच्छा करना चाहती है और इसमें इसकी मदद होनी चाहिए। शिक्षा शास्त्र के विभागध्यक्ष डॉ योगेन्द्रनाथ ओझा ने कहा कि जो काम मोदी जी ने किया है उसको सबसे पहले कांग्रेस ने सोचा था लेकिन भयंकर कठिनाईयों के कारण स्टेप नहीं ले सकी। समाज शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. दीनबन्धु तिवारी ने इस पूरे घटना क्रम को मोदी का फ्लॉप शो करार दिया। हिन्दी विभाग की विदुषी डॉ. इशरत जहां नोटबंदी को ठीक बताया लेकिन इसके लिए पूरी तैयारी की जरूरत बतायी। परिचर्चा में समाजशास्त्री डॉ. संजय पांडेय,डॉ. अमित कुमार राय,डॉ. नरेन्द्र प्रकाश राय, डॉ. मनोज पांडेय, डॉ. वंदना ओझा, डॉ. मुकेश प्रताप सिंह, डॉ. भावना, डॉ. कंचन दूबे, आलोक गुप्ता, डॉ. हर्ष श्रीवास्तव ने विचार रखे। अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अनिल यादव ने की।