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उपभोक्ता ही नहीं बैंककर्मी भी पस्त

Sat, 26 Nov 2016 01:19 AM IST
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
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यूबीआई शाखा केबंद पड़ा ओबीसी एटीएम।
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पांच और 1000 रुपए के नोट बंदी के बाद से जहां एक तरफ जनता के सामनें समस्याओं का पहाड़ खड़ा हो गया है।इससे बैंककर्मी भी अतिरिक्त कार्यभार के बोझ तले दब गये है। सुबह साढ़े नौ बजे आफिस पहुंचने के बाद वे उपभोक्ताओं के समस्याओं का हल करने में जुटे रहते है।
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   एक पखवारे से बढ़े काम के दबाव से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा है। रुपये न मिलने से परेशान उपभोक्ताओं की जली कटी बातें भी उन्हें अधिक परेशान कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंदी की घोषणा के बाद से बैंक और पोस्ट आफिस में कार्यरत कर्मियों पर कार्य का अतिरिक्त दबाब बढ़ गया है। पहले जहां उन्हें सिर्फ बैंकिंग और उससे जुड़े कार्यो को ही करना पड़ता था लेकिन अब नोटों की जांच, उसे बदलने एवं पुराने नोटों के एवज में नये नोट देने के साथ उसे बदलने आये लोगों की आईडी की जांच का भी अतिरिक्त कार्यभार से बैंककर्मी परेशान है।
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एसबीआई की मुगलसराय परमार कटरा स्थित शाखा के प्रबंधक कुमार परिमल ने बताया कि पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बदलने एवं खाते में जमा करने कार्य के चलते हर रोज तीन से चार घंटे अधिक कार्य करना पड़ रहा है। कहा कि अतिरिक्त कार्य के एवज में किसी भी प्रकार का रिफ्रेशमेंट भी कार्यरत कर्मियों को नहीं मिल रहा है। बैंक आफ बड़ौडा मुगलसराय शाखा के प्रबंधक एस मंडल ने बताया कि इससे बैंक के रुटीन कार्य भी प्रभावित हो रहे है। उन्होंने कहा कि भीड़ होने के कारण ज्यादातर कर्मियों को नोट बदलने व खाते से रुपये निकलाने के कार्य में लगा दिया है जिससे बैंक के शेष कार्यो के लिए कर्मचारियों की कमी महसूस हो रही है। बताया कि नोट बदलने के एवज में जो भी आईडी मिल रही है उसे कम्प्यूटर में फीड किया जा रहा है साथ ही एक काफी को सुरक्षित भी रखा जा रहा है आरबीआई या फिर किसी भी अधिकारी द्वारा मांगे जाने पर उसे सौंप दिया जायेगा।
उप डाकघर मुगलसराय के उपडाकपाल राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि हेड आफिस से जितने रुपये मिल रहे है उसी के हिसाब से खाताधारकों में रुपयों का वितरण किया जा रहा है। आवश्यकता से कम रुपये मिलने पर उपभोक्ता कई बार गाली गलौज तक पर उतर जा रहे है जो कि कर्मियों को मानसिक पीड़ा दे रहा है। 
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