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Chandauli News: जिले में 663 नहरों का जाल, फिर भी पानी के लिए किसान परेशान

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पीडीडीयू नगर। जिले की ज्यादातर नहरें बेपानी हैं जबकि धान की नर्सरी डालने का समय हो गया है। किसान पानी के लिए परेशान हैं और अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। नहरों में पानी छोड़ने का समय पांच जून निर्धाारित है लेकिन अभी भी नहरें सूखी हुई हैं। जिले में कर्मनाशा, लतीफशाह बीयर, चंद्रप्रभा बांध सिस्टम व नरायनपुर लिफ्ट कैनाल से निकली 663 नहरों और माइनरों का 856 किलोमीटर तक जाल फैला हुआ है। कृषि पर आधारित करीब 21 लाख की आबादी वाले जिले में 1.76 लाख लघु, सीमांत व 11 हजार 500 बड़े किसान हैं। वहीं तकरीबन एक 27 हजार हेक्टेयर भूमि में खरीफ व रबी फसलों की खेती होती है। चावल उत्पादन के मामले में प्रदेश में चंदौली का शाहजहांपुर के बाद दूसरा स्थान है। सालाना करीब पांच लाख एमटी धान का उत्पादन होता है। वर्ष 1951 में पहली पंचवर्षीय योजना के दौरान जिले को चंद्रप्रभा बांध की नींव पड़ी तो 1962 में मूसाखाड़ बांध की सौगात मिली। दोनों बांधों से निकली लेफ्ट कर्मनाशा व राइट कर्मनाशा के साथ नरायनपुर लिफ्ट कैनाल से निकली मुख्य गंगा नहर की बदौलत ही धान के कटोरे के अधिकांश खेतों की सिंचाई होती है। नरायनपुर पंप कैनाल से जुड़ी नहरों में वाटर लेबल कम होने की वजह से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे किसानों में आक्रोश पनप रहा है। नरायनपुर पंप कैनाल को बंद करने के फरमान ने आग में घी डालने का काम किया है। किसानों का आरोप है कि शासन स्तर पर किसानों की आय दोगुनी करने की घोषणा बेमानी है। किसानों ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के समय नहरों में पानी का अभाव किसानों के लिए बड़ा संकट है। अधिकारियों की मनमानी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में पूछे जाने पर एसडीओ सुधीर ओझा ने बताया कि गंगा नदी पर बने नारायनपुर पंप कैनाल में वाटर लेबल कम होने के कारण उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पंप कैनाल बंद कर दिया गया है। वाटर लेवल बढ़ने के बाद ही पंप कैनाल चालू किया जाएगा।
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