कूड़े खुर्द गांव आज केवल चंदौली जिले ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता की एक जीवंत मिसाल है। यहां की मिट्टी में मोहब्बत, सद्भाव और साझा विरासत की खुशबू रची-बसी है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा है। जब पूरा देश सांप्रदायिक तनाव की खबरों से जूझ रहा होता है, तब कूड़े खुर्द जैसे गांव उम्मीद और एकता की रौशनी फैलाते हैं
कूड़े खुर्द गांव में मोहर्रम के दिन एक और प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। जब मुस्लिम परिवार मातम में डूबे होते हैं और उनके घरों में चूल्हा नहीं जलता, तो गांव के हिंदू परिवार खिचड़ा पकाते हैं और पूरे सम्मान के साथ मुस्लिम भाइयों को अपने घर बुलाकर भोजन कराते हैं। इस अनोखी परंपरा में धर्म नहीं, इंसानियत और साझा संस्कृति की सेवा की जाती है। यह परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है और नई पीढ़ी भी इसमें पूरे दिल से भागीदारी करती है।