अस्मिता नाट्य संस्थान व रंजन मेमोरियल सेवा समिति के तत्वावधान में
आयोजित मुगलसराय महोत्सव के तीसरे दिन गुरुवार की रात स्व. चमेली देवी की
स्मृति में नाट्य प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन चेयरमैन रेखा जायसवाल ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
इस
अवसर पर संजय कुमार के निर्देशन में अंग नाट्य मंच बरियारपुर बिहार के
रंगकर्मियों ने प्रतिभा सिन्हा द्वारा लिखित नाटक आह्वान का बेहद जीवंतता
के साथ मंचन किया। रामलीला की पृष्ठभूमि से जुड़ा यह नाटक सीता की व्यथा
के साथ ही नारी विमर्श के मुद्दे को पूरी शिद्दत के साथ उठाता है।
नाटक
में पात्रों के अभिनय द्वारा राम को आज के भारतीय पुरूष के समान दिखाया
जाता है। वहीं नाटक में दिखाया जाता है कि वर्तमान समाज में व्याप्त
बुराईयों की तरह रावण की सत्ता सोच का विस्तार लगातार हो रहा है। वहीं
सीता, जो भारतीय नारी की लज्जा मर्यादा है, वह रावण के अत्याचारों को सहने
को विवश है। प्यारेलाल की रामलीला शैली में यह नाटक समाज की वर्तमान
परिस्थितियों को रेखांकित करता है।
वहीं प्रो. राजेंद्र सिंह
प्रदर्शनकारी कला शिक्षण कला केंद्र के कलाकारों द्वारा केशव प्रसाद सिंह
द्वारा लिखित नाटक अतिथि देवो भव: का मंचन किया गया। यह नाटक कुसुमाग्रज
की लघु कहानी बुध्द की मूर्ति को केंद्र में रखकर लिखा गया है। नाटक समाज
में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करता है।
नाट्य आलेख के माध्यम से यह भी
बताने का प्रयास किया गया है कि मानवता के कल्याण के लिए हिंसा का मार्ग
त्याग कर भगवान बुध्द द्वारा बताए गए अहिंसा के मार्ग पर चलना अधिक
श्रेयस्कर है। इस अवसर पर कार्यक्रम की मुख्य अतिथि महिला आयोग की
उपाध्यक्ष सुमन यादव ने कहा कि मुगलसराय महोत्सव का आयोजन एक प्रशंसनीय
कार्य है।
संस्था के महासचिव विजय कुमार गुप्ता द्वारा मुख्य अतिथि को
अस्मिता चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संतोष यादव, विरेंद्र
प्रताप सिंह दाढ़ी, रामजी गुप्ता, बृजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे। संचालन
प्रमोद अग्रहरी व कृष्णमोहन ने किया।
विजय कुमार गुप्ता ने आभार प्रकट किया।