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Chandauli News: करंट लगने से मां-बेटे की मौत

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धानापुर (चंदाैली)। थाना क्षेत्र के खड़ान गांव की राजभर बस्ती में बुधवार की देर शाम घर में लटक रहे बिजली के तार से करंट लगने से मां-बेटे की मौत हो गई। खेल खेल में बच्चे ने नंगा तार छू लिया और मासूम को बचाने के चक्कर में मां भी करंट की चपेट में आ गई।
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गांव निवासी जितेंद्र राजभर वेल्डिंग का कार्य करता था। उसकी शादी सात वर्ष पहले सकलडीहा निवासी चांदनी उर्फ प्रीति से हुई थी। दोनों से दो बेटे प्रिंस (8) के अलावा प्रियांशु (4) है। घर में बिजली के तार की ठीक से वायरिंग नहीं हुई है। एक कमरे से दूसरे कमरे तक असुरक्षित तरीके से तार दौड़ाए गए हैं। गर्मी की छुटि़्टयों में चांदनी अपने बेटों को लेकर मायके गई थी। बुधवार की सुबह ही सभी लौटे थे। शाम सात बजे घर के आंगन में दोनों बच्चे खेल रहे थे जबकि मां खाना बना रही थी। पिता जितेंद्र अपने काम में लगे थे। इसी बीच खेलते खेलते प्रिंस ने बिजली का तार छू दिया। तार बीच से कटा था। प्रिंस के छूते ही तार टूट गया और प्रिंस करंट की चपेट में आ गया। वह छटपटाने लगा। यह देख कर मां चांदनी दौड़ कर आई और बेटे को छूड़ाने के लिए उसे पकड़ा। इस चक्कर में वह भी करंट की चपेट में आ गई। मां-बेटे को छटपटाते देख घर के अन्य लोग दौड़े और डंडे के सहारे तार से दोनों को अलग किया।

दोनों को कमालपुर स्थित निजी चिकित्सक के यहां ले गए। यहां जांच के बाद चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। ग्राम प्रधान ने सूचना पुलिस को दी। जानकारी होने पर सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू भी पहुंच गए। धानापुर थानाध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि करंट की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत हुई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है।
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यकीन नहीं हो रहा कि मां और भाई अब नहीं उठेंगे



धानापुर। करंट की चपेट में आने से मां-बेटे की मौत ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को झकझोर दिया है। एक माह बाद पत्नी और बच्चों के मायके से घर लौटने पर पूरा परिवार खुश था। सभी चहक रहे थे। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाला प्रिंस स्कूल जाने के लिए उत्साहित था। वह दोस्तों से मिलने के लिए बेताब था। भइया के साथ छोटा मासूम प्रियांशु भी चहकते हुए घर आंगन का चक्कर काट रहा था। पत्नी और बेटे की मौत के बाद जितेंद्र राजभर रो रोकर बेहाल है। बहू और पोते की मौत के बाद जितेंद्र की मां भी सुध खो बैठी हैं। इन सबके बीच मासूम प्रियांशु को अहसास ही नहीं हो रहा था कि बड़ा भाई और मां हमेशा के लिए उससे दूर चले गए हैं। वह बार बार जाकर मां को उठाने की कोशिश करता है। यह देख कर हर किसी का कलेजा मुंह को आ जाता है।
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