-सांसत में यात्रियों की जान, नहीं हो रही कार्रवाई
पीडीडीयू नगर। जिले में कंडम हो चुके 50 से ज्यादा विक्रम अधिकारियों की अनदेखी के चलते अभी भी सड़क पर फर्राटा भर रहे हैं। इनकी मियाद बीत चुकी है। इनके सड़कों पर धड़ल्ले से चलने के कारण सड़क पर हादसे का डर रहता है। इन विक्रमों से हर रोज 200 से ज्यादा लोगों को ढोया जाता है। ऐसे में उनकी जान भी सांसत में पड़ी रहती है।
पीडीडीयू जंक्शन से वाराणसी से हर रोज विक्रम से सवारियां ढोई जाती हैं। इसके अलावा स्कूली बच्चों को भी विक्रम से ढोया जाता है। अधिक रुपये कमाने के चक्कर में चालक विक्रम में क्षमता से अधिक सवारी भरकर चलते हैं। जिले में 372 विक्रम पंजीकृत हैं, इनमें से 50 से अधिक की पंजीयन की मियाद बीत चुकी है। यह वाहन कंडम घोषित हो चुके हैं। राजस्व की चपत लगाने के साथ ये प्रदूषण और जाम का कारण भी बनते हैं। वहीं, फिटनेस फेल होने के कारण इनसे दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। सबसे अधिक विक्रम पीडीडीयू नगर से वाराणसी के लंका तक चलते है। कई बार सवारियां विक्रम पर लटकी तक नजर आती है। नगर के रहने वाले उमेश, रितेश, योगेंद्र, राघवेंद्र, सुमित ने विक्रम को बंद करवाने की मांग की है।
केस संख्या-1
30 मई 2024 को पीडीडीयू नगर के कैलाशपुरी में रहने वाली इशरावती देवी को कंडम विक्रम ने भोर में उस वक्त टक्कर मार दी वह सड़क पार कर रही थी। इसके बाद चालक विक्रम लेकर फरार हो गया। उपचार के दौरान ट्रॉमा सेंटर में इशरावती की मौत हो गई।
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केस-2
2017 में मुगलसराय थाना क्षेत्र के दुलहीपुर में सड़क पार कर रहे बुजुर्ग जलालुद्दीन को विक्रम ने टक्कर मार दी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
कोट
कंडम हो चुके वाहनों के सड़क पर चलता हुआ पाये जाने पर वाहनों को सीज कर दिया जाता है। विभाग की ओर से भी लगातार कार्रवाई की जाती है। कंडम हो चुके विक्रम सड़क पर चलते पाये गये तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-
डॉ. सर्वेश गौतम, एआरटीओ प्रशासन, चंदौली