मोहर्रम के मौके पर चंदौली जिले में दुल्हीपुर की शिया बस्ती में हर वर्ष की तरह इस बार भी दुलदुल, शबीहे ताबूत और अलम का जुलूस पूरी शान-ओ-शौकत से निकाला गया। अजादारी के इस मुबारक मौके पर हजारों की संख्या में अजादार शामिल हुए। जुलूस की शुरुआत गमगीन माहौल और इमामे हुसैन की याद में हुए मर्सियों से हुई।
मजलिस को उरूज हैदर ने खिताब किया, जिन्होंने मर्सिया पढ़ते हुए कहा मिलने के इश्तियाक मेरे दिल में रह गए, भैया हुसैन कौन सी मंज़िल में रह गए। इस मर्सिये को सुनकर अजादारों की आंखें भर आईं और गम के समंदर में डूबे हजारों मोमिन रो पड़े। उसके बाद नौहा पढ़ा गया, अब आया है दुलदुल, शबीर के मरने की ख़बर लाया है दुलदुल। जुलूस में बड़ी तादाद में अजादार शामिल रहे।
जुलूस परंपरागत रास्तों से होकर गुजरता हुआ इमामबाड़ा अली हमीद (पक्की) पर शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ। जुलूस में सम्मिलित प्रमुख अंजुमन के सदस्य अख्तर अब्बास जाफरी, कल्बे अब्बास जाफरी समेत कई अन्य अजादारों ने पूरे एहतेराम और अदब के साथ शहजादी को जद का पुरसा पेश किया। मुगलसराय कोतवाली के प्रभारी गगनराज सिंह भारी पुलिस बल के साथ जुलूस के साथ पूरे रास्ते निगरानी करते नजर आए। जुलूस के आयोजकों और अंजुमनों ने प्रशासन की व्यवस्था और सहयोग के लिए शुक्रिया अदा किया।