जो सामर्थ्यवान होता है उसके दोष भी गुण में बदल जाते हैं। भगवान शिव सामर्थ्यवान थे। इसलिए उनकी भेषभूषा व भांग धतुरे के सेवन के बावजूद उनका विवाह पार्वती से हुआ। पार्वती शिव के मिलने के बाद शिव के सारे दोष गुण में बदल गए। उक्त उद्गार क्षेत्र के खरौझा गांय में चल रहे संगीतमय श्रीराम कथा की दूसरी निशा में शनिवार की रात कथा वाचिका शालिनी त्रिपाठी ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भक्ति के मार्ग पर चलने पर जीवन में तमाम कठिनाइयां आती हैं। इन कठिनाइयों को सहन कर जो भक्ति के मार्ग पर निरंतर चलता रहता है। उसे एक न एक दिन भगवान जरूर मिलते हैं। माता पार्वती का भी घोर तपस्या के बाद शिव से मिलन हुआ था। कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। उन्हें भाव से जो भी भक्त यङाद करता है, उनकी भक्ति करता है। उसे भगवान के दर्शन अवश्य होते हैं। भक्ति के मार्ग पर चलते हुए मीरा ने तमाम यातनाएं झेली। प्रह्लाद ने भी प्रभु की भक्ति में खुद को समर्पित कर दिया था। अंत में इन्हें प्रभु का दर्शन मिला और उनका जीवन सार्थक हो गया। कहा कि मनुष्य को माता पिता व गुरु के वचनों को कभी टालना नहीं चाहिए।
मानस में गुरु को विश्वास कहा गया है और शिष्य को श्रद्धा। विश्वास और श्रद्धा का संबंध ही गुरु और शिष्य की परंपरा है। इसे अनुसरण कर जीवन की सार्थकता को पूरा किया जा सकता है। राधेश्याम द्विवेदी, विश्वनाथ द्विवेदी, राजेश सिंह, जयप्रकाश शर्मा, अरूण कुमार श्रीवास्तव, लोकेश कुमार द्विवेदी आदि उपस्थित रहे।