रामकथा के दौरान करते पंडित रामचंद्र मिश्र
भगवान अकथ, अनादि, अनूप, निर्गुण, निराकार हैं। परमात्मा श्रद्धा और विश्वास से प्राप्त होते हैं। मनुष्य को अगुण सगुण के भेद में न भटक कर प्रेम व निर्मल मन से कथा का श्रवण करना चाहिए। इससे मानव का कल्याण होगा। ये बातें मानस एवं आध्यात्म प्रचार समिति महुंजी बरहनी द्वारा आयोजित तीन दिवसीय रामकथा की पहले दिन रविवार की रात कथावाचक बद्री बाबा ने कहीं।
उन्होंने कहा दिल से कथा सुनने से मनुष्य का कल्याण होता है। कथा सुनने को बैठें लेकिन उसमें मन नहीं लगा तो सब व्यर्थ है। कहा कि सती शिव के साथ कुंभज ऋषि के आश्रम में कथा में बैठी तो अवश्य, लेकिन कथा में उनका मन नहीं लगा। इससे उन्हें जीवन में दुख ही दुख मिला और शरीर को योगाग्नि में जलाना पड़ा। पंडित रामचन्द्र मिश्र ने पार्वती चरित्र की लोकहितकारी कथा की विस्तृत व्याख्या की तो वहीं पंडित श्याम किशोर मिश्र ने मंगला चरण किया। इस दौरान लाल बहादुर सिंह ,नेहा ,सन्ध्या ,हरिओम गुप्ता ,बसीर अंसारी ,ध्रुव सिंह ,अरविन्द ,उर्मिला ,मंजू किरण आदि रहीं।