पड़ाव से पंचफेड़वा तक जीटी रोड के दोनों किनारे औषधीय पौधे लगाए जाने थे लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण तीन किलोमीटर तक लगाए गये पौधे सूख गए उनकी सुरक्षा के लिए लगे ट्री गार्ड भी गिर गए हैं। औषधीय पौधों को लगाए जाने के कारण इस मार्ग का नाम हर्बल र्माग रखा गया है।
औषधीय पौधों को बढ़ावा देने के लिए जून 2020 में पड़ाव से पंचफेड़वा तक 14 किलोमीटर तक सड़क के दोनों किनारों पर पौधे लगाने के लिए चिह्नित किया गया थो और उसका नाम हर्बल मार्ग रखा गया। इसके लिए 4.20 लाख रुपये दिये गये थे। पौधों को लगाने और रख-रखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को दी गई थी। लेकिन अब-तक तीन किमी डांडी से दामोदरदास पोखरे तक मात्र 60 पौधे लगाए गये। अधिकारियों और कर्मचारियों की देख-रेख के अभाव में ये पौधे भी सूख गए या पशुओं ने नष्ट कर दिया। इनकी सुरक्षा के लिए लगाए गये ट्री गार्ड भी जमीन पर गिर गए। मिले पैसे का 25 प्रतिशत हिस्सा भी खर्च हो गए और अभी तक निश्चित दूरी तक पौधे भी नहीं लगाए गए। जबकि इस मार्ग नाम हर्बल मार्ग रखा गया है।
पीडीडीयू नगर से पड़ाव मार्ग पर लगा है हर्बल मार्ग का बोर्ड
जीटी रोड के इस हिस्से का नाम पीडब्ल्यूडी विभाग ने हर्बल मार्ग कर बोर्ड भी लगा दिया है। लेकिन वहां एक भी औषधीय पौधे नहीं है। चंदासी स्थित एक मॉल के सामने सड़क की उत्तरी पटरी पर बोर्ड लगाया गया है। वहीं ट्री गार्ड में कुछ पौधे लगाए गए थे। विभाग ने ट्री गार्ड में पौधे भी रोपे लेकिन अब उनका पता नहीं है। औषधीय पौधों की जगह वहां आसपास झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है।
हर्बल रोड के रूप में पड़ाव से पचफेड़वा मार्ग को चिह्नित किया गया है। तीन किमी तक करीब 60 पौधे लगाए गए हैं। उनके संरक्षण के लिए ट्री गार्ड लगाया गया था लेकिन सड़क पर घुमंतू पशुओं ने पौधों को नुकसान पहुंचाया है। शीघ्र ही नए ट्री गार्ड और बाकी बचे मार्ग के दोनों किनारे पर औषधीय पौधे लगवा दिए जाएंगे।
डीपी सिंह, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी विभाग, प्रांतीय खंड, चंदौली।