कंदवा। मानव जीवन बड़े ही भाग्य से मिलता है। इस जीवन को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। भगवान की भक्ति में लगाने से मनुष्य भवसागर को पार कर सकता है। ईश्वर की भक्ति में बहुत बड़ी शक्ति होती है। यह बातें चिरईगांव में चल रहे चातुर्मास में शुक्रवार को प्रवचन के दौरान सुंदर राज महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति बड़ी सरल है। हम अपने अपने तरीके से ईश्वर की भक्ति करते हैं। गृहस्थ जीवन में रहने वाला व्यक्ति भी गृहस्थ जीवन के कार्यों को करते हुए मानव कल्याणकारी कार्य कर नारायण की ही भक्ति करता है, क्योंकि वह भगवान के बताए मार्ग पर चलता है। भगवान सभी की भक्ति को स्वीकार करते हैं तभी तो जिस भक्त को आवश्यकता पड़ती है भगवान उसकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने में समय नहीं लगाते हैं। कथा का रसपान करने वालों में अलका सिंह, आकांक्षा सिंह, पुष्पा सिंह, जागृति, उमा पांडेय, मृत्युंजय सिंह, हिमांशु पांडेय, हरिवंश सिंह, नरेंद्र सिंह मौजूद रहे।