आम के बागों में वसंत दुरुस्त उतरता है। पेड़ों पर खूब बौर लगे हैं। रात के समय खुशबू से अमराइयों के आसपास का इलाका तर हो जा रहा है। इससे बागवानी करने वाले गदगद हैं। उनको आम के अच्छे उत्पादन की आस है। कृषि वैज्ञानिक भी अच्छे उपज की उम्मीद जता रहे हैं। फलों के राजा आम की फसल ने बागवानी करने वालों को प्रफुल्लित कर दिया है। आम के पेड़ों में बड़ी मात्रा में बौर लगे हैं। कुछ जगहों पर उनमें टिकोरे भी आने लगे हैं। इसको देखकर किसान अंदाजा लगा रहे हैं कि अबकी उत्पादन अच्छा होगा। अधिकतर बागवानों ने अपने बाग में बड़ी मात्रा में लंगड़ा, चौसा, दशहरी आदि आमों के पेड़ लगाए हैं।
बागवानों का कहना है कि पेड़ों में बौर और फल लदे हुए हैं। अगर आधीं और ओला नहीं जैसी समस्या न आए और फसल पर बीमारी का प्रकोप न हो तो इस साल आम का उत्पादन काफी अच्छा रहेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि आम की फसल मौसम पर निर्भर करती है।यदि मौसम आगे भी अनुकूल रहा तो फसल अच्छी होगी। उन्होंने सलाह दी है कि बागवान आम के बौर को बचाने के लिए प्लानोफिक्स (एनएए) ढाई एमएल मात्रा 15 लीटर पानी में छिड़काव करें। इससे बौर व फल गिरना भी कम हो जाएगा और फल भी बढि़या से निकलेंगे।
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आम के फसल की निगरानी आवश्यक
कंदवा। आम के बौर की नियमित निगरानी आवश्यक है। उत्पादकों एहतियाती कदम समय रहते उठाना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक पछुआ हवा चलने से बौर में रोग व कवक का प्रकोप बढ़ सकता है। इससे बचाव के लिए बाग में दवाओं का प्रयोग अविलंब करना चाहिए। जिला उद्यान अधिकारी अलका श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान मौसम में फंगस व कीटों का प्रकोप तेजी से फैलता है। बागवानों को खर्रा रोग से बचाव के लिए ट्राइडोमॉर्फ 1.0 मिली लीटर एमएल या डाइनोकेप 1.0 मिली लीटर प्रति लीटर का घोल का छिड़काव करना चाहिए।