शिकारगंज। चकिया में सिंचाई के लिए एक करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से बनाई गई चरनी दो महीने में ही ध्वस्त हो ई। गरला जलकुंड और माइनर के तटबंध की मरम्मत दो महीने पहले की गई थी। बृहस्पतिवार को पानी छोड़ते ही जलकुंड की चरनी ध्वस्त हो गई, जिससे फसल जलमग्न हो गई। चंद्रप्रभा प्रखंड के द्वितीय उपखंड स्थित राइट पथरहवा बोदारा माइनर सहित गरला जलकुंड पर आधारित सैकड़ों किसाने के खेतों की सिंचाई लिए एक करोड़ 35 लाख रुपए की परियोजना स्वीकृत हुई। दो महीने पहले चरनी का निर्माण कराया गया था। निर्माण के दौरान मानक की अनदेखी का आरोप लगाते हुए किसानों ने जेई आलोक द्विवेदी, एई ऋषभ राय से शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई थी। नतीजा यह हुआ कि दो महीने में ही चरनी और कुलावा क्षतिग्रस्त हो गया। एक दिन पहले माइनर का तटबंध टूट गया था, जिससे 40 बीघा गेहूं की फसल जलमग्न हो गई गई है। भाकियू के तहसील अध्यक्ष वीरेंद्र पाल, धीरज श्रीवास्तव, चंद्रभान लाल, काशी यादव निरंजन मौर्या, साहब यादव आदि ने मरम्मत कराने के साथ निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है।