अयोध्या में कथित चंदा चोरी प्रकरण, मेरठ की दलित छात्रा हत्याकांड, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने नगर में प्रतिवाद मार्च निकाला। मार्च के बाद तहसील पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित 12 सूत्री ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। इससे पूर्व मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के कार्यकर्ताओं ने मां काली पोखरा से एसडीएम कार्यालय तक मार्च निकालकर सभा की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। गैरकानूनी बुलडोजर कार्रवाई, फर्जी मुकदमों में लोगों को फंसाने तथा जन आंदोलनों और प्रदर्शनों से पहले विपक्षी नेताओं को नजरबंद करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।
वक्ताओं ने सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, प्रयागराज, चित्रकूट और बांदा जिलों में निवास करने वाले कोल, मुसहर, बियार, गोंड सहित अन्य आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग की। साथ ही इन समुदायों को वनाधिकार अधिनियम, 2006 के दायरे में शामिल कर कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई। इस अवसर पर शंभूनाथ यादव, अनिल पासवान, लालचंद सिंह यादव, रामायण राम, लालमनी विश्वकर्मा, क्रांति पासवान, सुनैना कुमारी, बैजंती माला, रामनिवास पांडेय सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।