नगर सहित जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में जन्माष्टमी की धूम रही।
इस
दौरान भजन-कीर्तन व महिलाओं के सोहर से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
वहीं घरों में कृष्ण की बाल लीलाओं के जुड़ी झाकियां सजाई गईं।
नगर के
धर्मशाला रोड स्थित स्वर्ण आभूषण की दुकान में सभी दुकानदारों ने
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। आरती कर रहे रामानंद सेठ ने बताया कि
यहां जन्माष्टमी बनाए जाने का यह 150वां वर्ष है।
कुढ़े खुर्द गांव स्थित
संतोषी माता मंदिर प्रांगण में शनिवार की रात कृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन
धूमधाम से किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर को विद्युत लताओं व फूल मालाओं
से आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
जैसे ही आधी रात को कृष्ण का जन्म हुआ
आरती के साथ पूजा पाठ किया गया। पूरी रात भजन कीर्तन व सोहर गीत गूंजते
रहे। इससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर सुभाष, विजय, राहुल,
पंकज, मुन्नी देवी, रत्ना, गीता, लल्ली देवी, गिरिजा, गुड़िया, करन,
गोविंद आदि मौजूद रहे। इलिया संवाददाता के अनुसार- क्षेत्र के बिशुनपुरवा
गांव स्थित राधाकृष्ण मंदिर प्रांगण में शनिवार की रात जन्माष्टमी के अवसर
पर संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
पंडित सूर्यप्रकाश द्विवेदी ने
मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम का आगाज किया। इसके पश्चात वाराणसी से पधारे
सौरभ श्रीवास्तव ने ख्याल, बंदिश, ठुमरी, कजरी आदि की प्रस्तुति कर लोगों
को झूमने पर मजबूर कर दिया।
आधी रात के समय जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का
जन्म हुआ गायक कलाकार अन्नू ठाकुर ने कजरी व ठुमरी की मनमोहक प्रस्तुति से
समा बांध दिया। इस अवसर पर वृक्षबंधु परशुराम सिंह ने कहा कि भगवान
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व शिक्षक दिवस इस बार एक साथ पड़ना संयोग की बात है।
कहा कि कृष्ण योगगुरु थे। उन्होंने योग की महत्ता को बताकर योग की
सार्थकता और सार्वभौमिकता को प्रमाणित किया है।
अंत में कार्यक्रम संयोजक
विजय प्रकाश द्विवेदी ने कलाकारों व विशिष्ट जनों को अंगवस्त्रम भेटकर
सम्मानित किया। इस अवसर पर घुरफेकन द्विवेदी, रुद्रनारायण पांडेय, बंटी
सिंह, रामसूचित, चंद्रशेखर पांडेय, सुरेंद्र आदि मौजूद रहे।